जीवन का असली सुख, शांति और स्वास्थ्य में छिपा हुआ है, इन्हीं विचारों के साथ ‘ऊंचाई’ नामक संस्था अग्रवाल समाज के विभिन्न घटकों को एक साथ लाकर कार्यरत है. योग, ध्यान, एडवेंचर स्पोर्ट्स और विभिन्न स्वास्थ्य गतिविधियों समेत ‘ऊंचाई’ की एक विशेष पहल मन की बात भी है, जिसमें प्रत्येक रविवार को लोकप्रिय दै. ‘आज का आनंद’ में क्लब के सदस्य अपने विचार, अनुभव, भावनाएं और जीवन के महत्वपूर्ण सुझाव साझा करते हैं. उम्र बढ़ने पर सबसे बड़ी समस्या केवल बीमारी नहीं, बल्कि अकेलापन है. बढ़ती उम्र में इंसान को साथ की जरूरत होती है. इसी सोच से ‘ऊंचाई’ की शुरुआत हुई. ‘ऊंचाई’ केवल एक वॉकिंग ग्रुप या हेल्थ ग्रुप नहीं है. यह ऐसा मंच है जहां लोग मिलते हैं, साथ रहते हैं और जीवन का आनंद लेते हैं. ‘ऊंचाई’ की सोच यह थी कि जब लोग एक-दूसरे का साथ देते हैं और हौसला बढ़ाते हैं, तो उम्र के पचास के बाद का जीवन भी बहुत अच्छा और खुशहाल हो सकता है. जो काम एक छोटे विचार से शुरू हुआ था, वह धीरे-धीरे बहुत बड़ा बन गया. अग्रवाल समाज में ‘ऊंचाई’ को बहुत अच्छा स्वीकार किया गया, क्योंकि यह हमेशा से परिवार, साथ और समाज को महत्व देता आया है. लोगों को सबसे ज्यादा जो बात पसंद आई, वह थी अपनापन. सुबह मिलना, साथ में चाय पीना, हंसना, घूमना और साथ में फोटो खिंचवाना - इन छोटी-छोटी बातों ने लोगों के जीवन में खुशी भर दी. ‘ऊंचाई’ ने बहुत लोगों को जीवन का नया उद्देश्य दिया है. इसने दिखाया है कि बढ़ती उम्र का मतलब जीवन से दूर हो जाना नहीं है. बल्कि यह वह समय हो सकता है जब इंसान नए दोस्त बनाए, नई चीजें सीखें और जीवन को नए तरीके से जीयें.
मुस्कानों में है ‘ऊंचाई’ की सफलता ‘ऊंचाई’ की असली सफलता उसके सदस्यों की संख्या में नहीं बल्कि उन मुस्कानों, आत्मविश्वास और खुशी में है, जो उसने लोगों के जीवन में लाई है. बुढ़ापा आना तय है. लेकिन बुढ़ापे को खुशी, सम्मान और अपनेपन के साथ जीना हमारे हाथ में हैं.
- संजय लखीचंद अग्रवाल, कोर मेंबर, ‘ऊंचाई’