बुधवार पेठ, 7 जुलाई (आ.प्र.) आषाढ़ी वारी के लिए पंढरपुर प्रस्थान करने से पहले, संतश्रेष्ठ ज्ञानेेशर माऊली के पालकी समारोह के सम्मानित अेशों (घोड़ों) ने श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति मंदिर में आकर श्री गणपति के चरणों में श्रद्धापूर्वक सलामी अर्पित की. इस अवसर पर ‘माऊली माऊली’, ‘ज्ञानोबा-तुकाराम’ और ‘गणपति बाप्पा मोरया’ के अखंड जयघोष से गूंजते इस मंगल उत्सव के कारण पूरा मंदिर परिसर भक्ति रस में सराबोर हो गया था. देश के पहले सार्वजनिक गणेश मंडल श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट ने सम्मानित घोड़ों का विधि-विधान से पूजन किया. कर्नाटक के बेलगाम जिले के अंकली से श्रीमंत उर्जितसिंह शितोले (सरकार) के स्वामित्व वाले ये सम्मानित घोड़े पुणे पहुंचे. इस अवसर पर ट्रस्ट के अध्यक्ष संजीव जावले, ट्रस्टी, पदाधिकारी, कार्यकर्ता और श्रीमंत उर्जितसिंह शितोले (सरकार), श्रीमंत महादजी राजे शितोले (सरकार) उपस्थित थे. श्रीमंत उर्जितसिंह शितोले (सरकार) ने कहा, हर साल आषाढ़ी वारी से पहले श्री गणेश के दर्शन करने के बाद ही ये घोड़े आलंदी के लिए प्रस्थान करते हैं. श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति के चरणों में वंदन करके वारी की शुरुआत करने की यह अनोखी परंपरा हमारे लिए अत्यंत पवित्र है. माऊली की कृपा व गणराय का आशीर्वाद इसी तरह बना रहे, यही प्रार्थना है. श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट के अध्यक्ष संजीव जावले ने कहा, आषाढ़ी वारी केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि यह भक्ति, समर्पण व सेवा भावना का प्रतीक है. उन्होंने कहा, वारकरियों की सेवा में योगदान देने का अवसर श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति ट्रस्ट को मिलता है, उन्होंने बताया, ट्रस्ट की ओर से स्वास्थ्य सेवा, भोजन सेवा, चरण सेवा (पैरों की मालिश/ सेवा) और दवा वितरण जैसे विभिन्न उपक्रमों के माध्यम से वारकरियों की सेवा करने का निरंतर प्रयास किया जाता है. वारकरियों की सेवा के लिए विभिन्न कार्यक्रम ट्रस्ट की ओर से वारकरी सेवा के लिए चलाए जाने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी इस अवसर पर दी गई. इसके अंतर्गत स्वास्थ्य जांच, मुफ्त चिकित्सा परामर्श, मुफ्त दवा वितरण, भोजन सेवा, चरण सेवा, अंगदान जागरूकता के साथ-साथ अन्य सेवाभावी उपक्रमों के माध्यम से वारकरियों की सेवा की जाएगी.