सीए अमोल दातार
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टैक्सपेयर्स को अपनी इनकम का सरकारी रिकॉर्ड से मिलान करना चाहिए, सभी टैक्सेबल इनकम की जानकारी देनी चाहिए, सिर्फ सही डिडक्शन का दावा करना चाहिए और फाइल करने के तुरंत बाद रिटर्न को वेरिफाई करना चाहिए. आयकर रिटर्न (ITR) भरने की आखिरी तारीख उन योग्य टैक्सपेयर्स के लिए 31 अगस्त है, जिन्हें इनकम टैक्स फॉर्म 3 और 4 भरना होता है. सही तरीके से और समय पर रिटर्न भरने से नोटिस, पेनल्टी और रिफंड मिलने में देरी से बचा जा सकता है. अपना ITR जमा करने से पहले, सभी फाइनेंशियल जानकारी को वेरिफाई करना और यह पक्का करना जशरी है कि दी गई जानकारी पूरी और सही हो.
पहली जरूरी बात यह है कि अपनी इनकम के सोर्स, रेजिडेंशियल स्टेटस और टैक्सपेयर की कैटेगरी के हिसाब से सही आयकर रिटर्न फॉर्म चुनें. गलत फॉर्म से फाइल करने पर रिटर्न को ‘डिफेक्टिव’ (खामी वाला) माना जा सकता है. इनकम टैक्स रिटर्न जमा करते समय यह चेक करना जशरी है कि आपका PAN, आधार, नाम, जन्म तिथि, पता, ईमेल एड्रेस, मोबाइल नंबर और बैंक अकाउंट की जानकारी सही है. गलत जानकारी से रिफंड और भविष्य के कम्युनिकेशन में देरी हो सकती है. इनकम टैक्स रिटर्न तैयार करते समय पहला कदम यह है कि अपने रिटर्न में बताई गई इनकम की तुलना Form 26 S, एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट ( AIS) और टैक्सपेयर इंफॉर्मेशन समरी (TIS) से करें. ऊपर दिए गए डेटा के आधार पर ही सही रिटर्न तैयार किया जाना चाहिए. टैक्सपेयर को यह पक्का करना चाहिए कि सैलरी, ब्याज और डिविडेंड सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन और प्रॉपर्टी ट्रांजैक्शन टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (TDS) ये सभी उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल खाते हों. इनकम टैक्स रिटर्न भरने से पहले किसी भी अंतर को ठीक कर लेना चाहिए. इनकम टैक्स रिटर्न में इनकम के सभी सोर्स की जानकारी देनी चाहिए. मुख्य सोर्स में शामिल हैं- सैलरी या पेंशन सेविंग अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट से ब्याज, किराए से इनकम, कैपिटल गेन्स और डिविडेंड इनकम, फ्रीलांसिंग या प्रोफेशनल इनकम, विदेशी एसेट्स या इन्वेस्टमेंट से इनकम (जहां लागू हो) इनकम न बताने पर नोटिस मिल सकता है और अतिरिक्त टैक्स देनदारी हो सकती है. टैक्सपेयर को यह पक्का करना चाहिए कि क्लेम किए गए डिडक्शन और छूट के लिए सही डॉक्यूमेंट्स मौजूद हों. आम डिडक्शन में योग्य इन्वेस्टमेंट, इंश्योरेंस प्रीमियम, मेडिकल इंश्योरेंस, एजुकेशन लोन, डोनेशन और लागू टैक्स सिस्टम के तहत अन्य डिडक्शन शामिल हैं. टैक्स देनदारी की गणना करते समय टैक्सपेयर को यह चेक करना चाहिए कि TDS सही तरीके से काटा और दिखाया गया है या नहीं, और एडवांस टैक्स व सेल्फ-असेसमेंट टैक्स पेमेंट सही ढंग से जमा हुए हैं या नहीं. ब्याज की देनदारी कम करने के लिए रिटर्न भरने से पहले बचा हुआ टैक्स चुकाना टैक्सपेयर की जिरमेदारी है. टैक्सपेयर को यह भी पक्का करना चाहिए कि रिफंड पाने के लिए चुना गया बैंक अकाउंट एक्टिव हो, पहले से वेरिफाइड हो और जहां जरूरी हो, PAN से लिंक हो.
IRT को वेरिफाई करना बेहद जरूरी
सबमिशन से पहले समीक्षा और ई-वेरिफिकेशनटैक्सपेयर को फाइनल सबमिशन से पहले रिटर्न में दिए गए हर शेड्यूल को ध्यान से देखना चाहिए. आंकड़ों, बैंक डिटेल्स या डिडक्शन में छोटी-मोटी गलतियों की वजह से प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है या नोटिस मिल सकता है. आखिरी कदम तय समय के अंदर बताए गए इलेक्ट्रॉनिक तरीकों या किसी दूसरे मंजूर तरीके से खढठ को वेरिफाई करना है. बिना वेरिफाई किए गए रिटर्न को फाइल नहीं माना जाता है.