पुणे, 9 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
पुणे एयरपाेर्ट और वायुसेना परिसर के आसपास तेजी से हाे रहे शहरीकरण के कारण हवाई सुरक्षा के सामने चुनाैतियां बढ़ती जा रही हैं. एयरपाेर्ट क्षेत्र में निर्माण के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) के आवेदनाें में पिछले कुछ वर्षाें में लगातार वृद्धि हुई है. आंकड़ाें के अनुसार, वर्ष 2020 में एनओसी के लिए 1 हजार 62 आवेदन प्राप्त हुए थे.
वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 1 हजार 408 हाे गई.
एयरपाेर्ट के आसपास किसी भी निर्माण काे अनुमति देते समय इमारत की ऊंचाई, भाैगाेलिक स्थिति तथा विमानाें के उड़ान और उतरने के मार्ग से उसकी दूरी काे प्रमुखता से ध्यान में रखा जाता है.
हवाई यातायात में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हाे, इसके लिए संबंधित विभागाें से आवश्यक अनुमति लेना अनिवार्य है. अंतरराष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (आईसीएओ) ने विमानतल और वायुसेना अड्डाें के आसपास निर्माण की ऊंचाई के संबंध में निश्चित मानक निर्धारित किए हैं.
हालांकि, नियमाें का पालन किए बिना बनाए जा रहे अवैध भवनाें और अतिरिक्त निर्माण के कारण विमानाें के उड़ान मार्ग में बाधा उत्पन्न हाेने की आशंका है. इसलिए ऐसे निर्माणाें पर समय रहते नियंत्रण और कार्रवाई करना आवश्यक है.
ड्राेन और लेजर से भी खतरा
एयरपाेर्ट के आसपास स्थित ऊंची इमारताें से ड्राेन उड़ाने अथवा लेजर लाइट का इस्तेमाल किए जाने की आशंका से सुरक्षा एजेंसियाें की चिंता बढ़ गई है. ड्राेन के विमान के मार्ग में आने से गंभीर खतरा पैदा हाे सकता है. वहीं, लेजर किरणाें के पायलट की आंखाें पर पड़ने से उड़ान के दाैरान परेशानी उत्पन्न हाे सकती है. इसलिए एयरपाेर्ट क्षेत्र की सुरक्षा अब केवल निर्माण की ऊंचाई तक सीमित नहीं रह गई है.
विकास के साथ सुरक्षा का संतुलन जरूरी :
विमानाें की बढ़ती संख्या, हवाई यातायात के विस्तार और विमानतल के आसपास तेजी से हाे रहे शहरीकरण के कारण वायुसेना तथा विमानतल प्रशासन के सामने तकनीकी और सुरक्षा संबंधी चुनाैतियां बढ़ रही हैं.
शहर के विकास काे राेका नहीं जा सकता, लेकिन यह विकास हवाई सुरक्षा के निर्धारित नियमाें के दायरे में ही हाेना आवश्यक है. नियमाें का उल्लंघन करने वाले निर्माणाें पर नियंत्रण के लिए वायुसेना ने मनपा से पत्राचार किया है, ऐसी जानकारी रक्षा विभाग के जनसंपर्क अधिकारी अंकुश चव्हाण ने दी.