पुणे, 9 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) पुणे संवाद के तत्वावधान में एस.पी. कॉलेज के काकासाहेब चितले सभागार में ‘नक्सलिज्म : ए वॉर विदिन’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित नागपुर विभाग के विशेष पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटिल ने कहा कि नक्सलवाद का मुकाबला करने में केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. सुरक्षा अभियानों के साथ-साथ विकास, बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की स्थितियों में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव आया है. उन्होंने नक्सलवाद को आदिवासी समाज के विकास और संस्कृति के लिए गंभीर खतरा बताते हुए स्पष्ट किया कि ‘वेिशास, निर्माण और जनकल्याण’ के तीन मुख्य स्तंभों के आधार पर सरकार की उपस्थिति दूर-दराज के इलाकों तक मजबूत हुई है. इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास व कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व सुधार : नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के कायाकल्प के लिए सड़कों और डिजिटल कनेक्टिविटी को विशेष प्राथमिकता दी गई है. वर्ष 2014 से अब तक नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 12,249 किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जबकि 17,319 किलोमीटर की अतिरिक्त परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा, दुर्गम इलाकों में 9,600 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए हैं, जिससे सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों के 96 प्रतिशत गांवों तक मोबाइल कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है. इस कनेक्टिविटी के चलते शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और रोजगार के अवसर दूर-दराज के इलाकों में आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं. सुरक्षा ढांचा और आधुनिक तकनीक का सुदृढ़ीकरण : क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 597 सुदृढ़ पुलिस स्टेशनों की स्थापना की गई है. इसके सुखद परिणाम स्वरूप, 2014 में नक्सली घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज करने वाले 333 पुलिस स्टेशनों की संख्या घटकर अब मात्र 16 रह गई है. इसके साथ ही 408 नई CAPF सुरक्षा छावनियों का निर्माण किया गया है. CoBRA, CRPF, DRG और STF जैसे विशेष बलों के बेहतर समन्वय, आधुनिक तकनीक, ड्रोन, सैटेलाइट इमेज और डेटा विलेषण के उपयोग ने सुरक्षा बलों की परिचालन क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है. केंद्र सरकार द्वारा 2015 में लागू की गई ‘राष्ट्रीय नीति और कार्य योजना’ ने सुरक्षा, संवाद और समन्वय का एक व्यापक ढांचा तैयार किया है. पीड़ितों के व्यक्तिगत अनुभव, पुनर्वास और हिंसा में आई भारी कमी संगोष्ठी में नक्सलवाद का प्रत्यक्ष सामना करने वाले पुलिस अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए. गंगा एम्पावर ने बताया कि कैसे नक्सलियों ने उनके पिता की निर्मम हत्या कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हार न मानते हुए पुलिस बल में शामिल होने का निर्णय लिया. गजानन धाड़े और कुमुद अत्राम ने भी नक्सली मुठभेड़ों और व्यक्तिगत संघर्षों के अनुभव साझा किए. नक्सल विरोधी अभियान में पुनर्वास नीति भी अत्यंत कारगर सिद्ध हुई है; 2025 में 2,337 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि 2024 से मार्च 2026 के बीच 3,927 लोगों ने हथियार डाले. इसके परिणामस्वरूप नक्सली घटनाओं की संख्या 2014 के 870 से घटकर 2025 में 234 पर आ गई और मौतों की संख्या 310 से घटकर 100 हो गई. सुरक्षा से विकास संभव हुआ, विकास से वेिशास जगा और उसी वेिशास के बल पर जनकल्याणकारी योजनाएं आज अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रही हैं.