चीनी मिलें कायर्क्षमता बढ़ाने पर जोर दें

‌‘डेक्कन शुगर टेक्नोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन‌’ के अधिवेशन में पूर्व मंत्री जयंत पाटिल ने कहा

    10-Aug-2026
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पुणे, 9 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवा पीढ़ी चीनी का सेवन न करने की संस्कृति अपना रही है. ऐसे में चीनी मिलों को अब नए शोध को अपनाते हुए गन्ने से विभिन्न उत्पाद तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है. मिलों की क्षमता बढ़ाने के बजाय उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जाना चाहिए, ऐसा प्रतिपादन पूर्व वित्त मंत्री एवं एनसीपी के नेता जयंत पाटिल ने किया. वे डेक्कन शुगर टेक्नोलॉजिस्ट्स एसोसिएशन के 71वें वार्षिक अधिवेशन के उद्घाटन अवसर पर बोल रहे थे. इस अवसर पर पूर्व मंत्री राजेश टोपे, दिलीप देशमुख, बी. बी. ठोंबरे, चीनी आयुक्त डॉ. संजय कोलते, शेखर गायकवाड़, आर. वी. कुंभार, एसोसिएशन के अध्यक्ष सोहन शिरगांवकर तथा उपाध्यक्ष एस. डी. बोखारे उपस्थित थे. पाटिल ने कहा गन्ने को आधार मानकर उससे चीनी के अलावा विभिन्न उत्पाद तैयार करने की आवश्यकता है. आने वाले दस वर्षों में नई चुनौतियां सामने आएंगी. इसलिए नई तकनीक को अपनाते हुए बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव के साथ-साथ ग्राहकों की बदलती अपेक्षाओं का सामना करना होगा. उन्होंने कहा वेिश की तुलना में देश के चीनी उद्योग की व्यावहारिकता कम हुई है. पहले चीनी मिलें 160 से 180 दिनों तक चलती थीं, लेकिन अब 90 से 100 दिनों तक मिलों का संचालन करना भी मुश्किल हो गया है. वैेिशक बाजार में टिके रहने के लिए सस्ते और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने होंगे. इस अवसर पर जयंत पाटिल के हाथों चीनी उद्योग गौरव, सर्वश्रेष्ठ चीनी मिल, तकनीकी उत्कृष्टता, औद्योगिक उत्कृष्टता तथा जीवनगौरव सहित विभिन्न पुरस्कार प्रदान कर विजेताओं को सम्मानित किया गया.