चाकण औद्योगिक क्षेत्र से कई कंपनियां होंगी स्थानांतरित

5000 कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर खतरा : बुनियादी सुविधाएं न होने से कंपनियां परेशान

    11-Aug-2026
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चाकण, 10 अगस्त (आ.प्र.)
वैश्विक स्तर पर ‘ऑटाे हब’ के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले चाकण औद्याेगिक क्षेत्र काे मंदी का ग्रहण लगने वाला है और इस क्षेत्र की लगभग 50 से 60 औद्याेगिक कंपनियां स्थानांतरित (शिफ्ट) हाे रही हैं. इसके कारण लगभग तीन से चार हजार कर्मचारियाें और उनके परिवाराें पर बेराेजगारी की गाज गिरने वाली है. औद्याेगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के अभाव के चलते ये कंपनियां स्थानांतरित हाे रही हैं, यह चाैंकाने वाली वास्तविकता सामने आई है.
 
सड़क, पानी, बिजली, कचरा और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से यह क्षेत्र जूझ रहा है और इन परेशानियाें से तंग आकर कंपनियां सातारा जिले में स्थानांतरित हाे रही हैं. औद्याेगिक क्षेत्र काे जाेड़ने वाली और आंतरिक सड़काें की बेहद दयनीय हालत है. भारी वाहनाें (कंटेनराें) की आवाजाही अधिक हाेने के कारण सड़काें पर ट्रैफिक जाम का सबसे बड़ा असर पड़ता है. इसके अलावा सड़काें की खराब हालत और पार्किंग व्यवस्था पर प्रशासन द्वारा ध्यान न दिए जाने का आराेप स्थानांतरित हाे रही कंपनियाें के मालिकाें ने लगाया है.
 
इस क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उद्याेग हाेने के कारण कई विदेशी मेहमानाें का लगातार आना-जाना लगा रहता है, जिससे अनजाने में ही उन्हें औद्याेगिक क्षेत्र की बदहाली देखने काे मिलती है. चाकण क्षेत्र के स्थानीय लाेगाें ने ट्रैफिक जाम काे लेकर संबंधित विभाग काे समय-समय पर प्रदर्शन, आंदाेलन और ज्ञापन दिए हैं. कंपनियाें में काम करने वाले कर्मचारी परिसर के भीतर सुरक्षित रहते हैं, लेकिन सड़काें पर यात्रा करते समय आगे क्या हाेगा, इसी डर के साये में वे कंपनी से घर तक का जानलेवा सफर करते हैं. हालांकि, संबंधित अधिकारियाें की इच्छाशक्ति की कमी के कारण इस समस्या की घाेर उपेक्षा हाे रही है. इस क्षेत्र के लिए पुणे-नासिक एलिवेटेड मार्ग और रेलवे का लालच दिया जा रहा है, लेकिन धरातल पर काम शून्य हाेने से जनप्रतिनिधियाें और शासन के प्रति जनता में भारी नाराजगी का माहाैल है.
 
पानी का कने्नशन लेने भारी-भरकम खर्च पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ शहर सहित खेड़, शिरूर और दाैंड तहसीलाें के कुछ हिस्साें के लिए वरदान साबित हुआ भामाआसखेड़ बांध औद्याेगिक क्षेत्र के पास ही स्थित है, लेकिन इस बांध के पानी का लाभ औद्याेगिक क्षेत्र काे नहीं मिल पा रहा है. कंपनी के लिए नल का कनेक्शन लेने के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भारी वित्तीय लेन-देन (खर्च) करना पड़ता है. बड़ा औद्याेगिक क्षेत्र हाेने के बावजूद सीवेज याेजना का अभाव स्पष्ट रूप से महसूस हाेता है, यह कड़वी सच्चाई कर्मचारियाें ने व्यक्त की है.
 
कचरे के ढेराें की काेई कमी नहीं औद्याेगिक क्षेत्र परिसर में चाकण नगर परिषद सहित 8 से 10 ग्राम पंचायतें आती हैं, लेकिन आपस में समन्वय की कमी के कारण कचरे की समस्या विकराल रूप ले चुकी है. सड़काें के दाेनाें ओर कचरे के ढेर साफ देखे जा सकते हैं.
 
औद्याेगिक क्षेत्र में महसूस हाेने वाली समस्याओं पर शासन का ध्यान क्याें नहीं है, यह एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है. इससे पहले भी कुछ कंपनियां गुजरात राज्य में स्थानांतरित हाे चुकी हैं.