एथेनॉल के बाद बायो-सीएनजी का 'मास्टर प्लान'

केंद्र द्वारा स्वच्छ ऊर्जा हेतु 23,731 करोड़ की "गोबरधन योजना" को मंजूरी

    11-Aug-2026
Total Views |

renewablegass 
नई दिल्ली, 10 अगस्त (वि. प्र.)
पेट्राेल में 20 प्रतिशत एथेनाॅल के सफल मिश्रण के बाद अब केंद्र सरकार ने सीएनजी क्षेत्र के लिए भी एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश की प्राकृतिक गैस आपूर्ति में बायाे-सीएनजी काे मिलाने के लिए 23,731 कराेड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ ‘गाेबरधन’ राष्ट्रीय सर्कुलर बायाेनर्जी याेजना काे मंजूरी दे दी है. वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक (अगले 10 वर्षाें के लिए) लागू की जाने वाली इस याेजना का मुख्य उद्देश्य भारत में स्वदेशी बायाे-सीएनजी के उत्पादन काे कई गुना बढ़ाना, स्वच्छ ईंधन काे बढ़ावा देना और देश की ऊर्जा सुरक्षा काे मजबूत करना है.
 
मवेशियाें के गाेबर, पराली, नगरपालिका के ठाेस कचरे और चीनी मिलाें के उप-उत्पादाें जैसे जैविक कचरे से तैयार हाेने वाली यह बायाे-सीएनजी शाेधन के बाद रासायनिक रूप से प्राकृतिक गैस जैसी ही हाेती है.
 नई गाेबरधन याेजना एक ही राष्ट्रीय ढांचे के तहत बायाे-सीएनजी इकाेसिस्टम की सभी आवश्यकताओं काे पूरा करती है.
 
इसके तहत बायाे-सीएनजी निर्माताओं के लिए बिक्री सुनिश्चित की गई है, क्याेंकि सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (उॠऊ) कंपनियां अनिवार्य रूप से उनसे सीबीजी (कंप्रेस्ड बायाे-गैस) खरीदेंगी. सरकार ने बायाेसीएनजी के लिए 2,110 रुपये प्रति चचइढण की एक स्थिर दर (फिक्स्ड एडमिनिस्टर्ड प्राइस) तय की है, जिससे कंपनियाें काे दीर्घकालिक राजस्व मिलेगा.
 
इसके अलावा, नए ग्रीनफील्ड सीबीजी प्राेजेक्ट्स काे प्रति टन प्रतिदिन (ढझऊ) स्थापित क्षमता पर 2 कराेड़ रुपये तक की पूंजीगत सहायता मिलेगी. याेजना में सीधे पाइपलाइन कनेक्टिविटी, एमएसएमई के लिए क्रेडिट गारंटी सपाेर्ट और कचरा जुटाने के लिए एक विशेष ‘चैलेंज फंड’ का भी प्रावधान किया गया है.
 
देश में बायाे-सीएनजी के उत्पादन काे अगले एक दशक में करीब 10 गुना बढ़ाने के लक्ष्य के साथ सरकार ने सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियाें के लिए चरणबद्ध ब्लेंडिंग टारगेट तय किए हैं. इसके अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में सीएनजी आपूर्ति में 3 प्रतिशत बायाे-सीएनजी का मिश्रण अनिवार्य हाेगा, जिसे वित्त वर्ष 2027-28 में बढ़ाकर 4 प्रतिशत किया जाएगा.