प्रश्न: मैं जानती हूं कि कुछ इटलीवासी नशीली आदताें से छुटकारा पाने के लिए आपके पास आ रहे हैं. ्नया उनके लिए काेई उम्मीद है?
निश्चित ही, क्योंकि मैं उन्हें और बड़ा नशा पिलाता हूं. वे ्नया खाक नशा करेंगे इटली में! काेई मारिजुआना, काेई हशिश, काेई गांजा, काेई अफीम, काेई एल.एस.
डी. मैं उन्हें ध्यान दे रहा हूं. जिसकाे ध्यान का नशा लग गया, फिर सब नशे छूट जाते हैं. और ध्यान के नशे की एक खूबी हैः यह नशा है भी और नशा नहीं भी है. ध्यान बड़ा विराेधाभासी नशा है. यह जगाता भी है और डुबाता भी है. यह मदमाता भी है. यह मस्ती से भी सराेबार कर देता है, और यह परम काे भी जगा देता है. यह तुम्हारे भीतर चैतन्य काे भी प्रखर करता है, तुम्हारी मूर्च्छा काे भी ताेड़ता है, और तुम्हारे पैराें में नृत्य भी दे देता है. यह तुम्हें गीत भी देता है-ऐसे गीत, ऐसे रंग कि तुम्हारे प्राणाें में इंद्रधनुष फैल जाएं कि तुम्हारे प्राणाें में कमल खिल जाएं! उसने इस नशे काे किया उसके सब नशे भी छूट जाते हैं.
मेरी ताे दृष्टि यही है कि जाे लाेग भी दुनिया में नशा कर रहे हैं वे असल में ध्यान की ही तलाश कर रहे हैं.
उन्हें ध्यान का पता नहीं चल रहा है, इसलिए बेचारे अंधेरे में टाेटल रहे हैं, जाे हाथ लग जाता है. शराब किसी ने पी ली, मैं मानता हूं कि वह ध्यान की ही तलाश कर रहा है. लेकिन ध्यान ताे बाेतलाें में बंद हर जगह मिलता नहीं; शराब मिल जाती है. शराब पीकर भी वह ्नया कर रहा है? वह यही कर रहा है कि थाेड़ी देर काे मन के उपद्रव भूल जाना चाहता है. मगर मन में उपद्रव मिटते नहीं; दूसरे दिन सुबह फिर पास खड़े हैं, दुगनी ताकत से खड़े हैं. जाे आदमी मारिजुआना, एल.एस.डी.
और इस तरह के नशे ले रहा है, वह ्नया कर रहा है? उसकी जिंदगी फीकी हाे गई है, उदास हाे गई है, ऊब से भर गई है. अब उसे जिंदगी में कुछ रस और अर्थ नहीं मालूम हाेता. वह घबरा गया है.
सब रंग खाे गए हैं, सब गीत उजड़ गए हैं. कहीं कुछ ऐसा नहीं लगता जिसमें गरिमा हाे, महिमा हाे. उसे लगता है कि मिट जाऊं, मर जाऊं या कुछ रास्ता मिले-जिससे अर्थवत्ता पैदा हाे. ताे बेचारा नशा कर लेता है. नशा कर लेता है ताे फिर वृक्ष हरे दिखाई पड़ते हैं थाेड़ी देर काे, फिर सुंदर मालूम हाेते हैं, फिर तितलियाें में परमात्मा के हस्ताक्षर अनुभव हाेते हैं, फिर चांद-ताराें में राेशनी आ जाती है, फिर उसकी आंखें चमकती हैं बच्चाें की तरह, फिर आश्चर्यविमुग्ध हाेता है वह. लेकिन यह कितनी देर टिकेगा? थाेड़ी देर बाद फिर वापस इसी भूमि पर खड़ा है. वह सिर्फ कल्पना थी. ध्यान उसी काे स्थिर रूप से देता है. नशे, जिसकी केवल भ्रामक अनुभूति देते हैं, ध्यान उसी काे स्थिर रूप से देता है. और एक बार देता है ताे फिर जाता नहीं.
मैं काेई नशे करने वालाें का इलाज नहीं कर रहा हूं. मैं उनकी खाेज पहचानता हूं. इसलिए मेरे पास जब आकर काेई नशे करने वाला कहता है कि ्नया मैं भी संन्यासी हाे सकता हूं, क्योंकि मैं शराबी हूं, क्योंकि मुझे गांजा पीने की आदत है? मैं कहता हूंः तुम इसलिए ताे शराबी हाे, तुम गांजा पीते थे कि अंधेरे में टटाेलते थे. अब तुम राेशनी में आ गए. अब तुम संन्यासी हाे ही जाओ.
जिसने कभी गांजा नहीं पीया, जिसने कभी अफीम नहीं खाई, जाे गाेबर-गणेश की तरह किसी दुकान पर बैठा रहा हमेशा, वह ्नया खाक संन्यासी हाेगा! तुम कम से कम तुम खाेज ताे करते थे. खाेज गलत जा रही थी, मगर खाेज ताे खाेज है. गलत हाे ताे भी कम से कम है जाे! गलत खाेजता है वह एक दिन ठीक भी खाेज लेगा.
मैं काेई इलाज नहीं कर रहा. लेकिन मैं इतना बड़ा नशा दे देता हूं उसके सामने छाेटे नशे अपने से डूब जाते हैं. तुम चुल्लू भर पानी में डूबने की काेशिश कर रहे थे. मैं कहता हूं; सागर है पूरा, कहां तुम चुल्लू भर पानी में डूब रहे हाे! कैसे डूबाेगे? यह रहा सागर, माराे डुबकी, फिर निकलना ही नहीं.