पाेषण विज्ञानियाें यानी न्यूट्रीशनिस्टाें के अनुसार यह महत्वपूर्ण है कि हम अपनी जीवनशैली के अनुसार पानी पीएं न कि प्रतिदिन 8 गिलास पानी पीने के नियम से बंधे रहें. पानी हमारे शरीर का मुख्य रासायनिक तत्व है और साथ ही वह एक प्राकृतिक डीटाॅ्नसीफायर है. हममें से अधिकांश लाेग इस बात के प्रति प्रतिदिन कितना पानी पीना हमारे लिए सबसे बढ़िया रहता है.
इसके साथ ही 8 बाई 8 का नियम, जिसके अनुसार हर व्य्नित काे प्रतिदिन 8 गिलास पानी पीने चाहिएं जिनमें 8 औंस पानी हाे, प्रत्येक के लिए सही नहीं हाे सकता.
पाेषण विज्ञानी वीनू हिरानी के अनुसार ‘‘हालांकि प्रतिदिन 8 से 10 गिलास पानी पीने की आम मान्यता है. परंतु ऐसी सलाह दी जाती है कि प्रतिदिन तरल पदार्थाें के 12 से 15 गिलास पीए जाएं जिनमें पानी, चाय छाछ तथा सूप आदि शामिल हैं. इस मात्रा के अनुसार हमें प्रतिदिन 2.5 लीटर तरल पदार्थाें का सेवन करना चाहिए.’’ जीवन शैली के अनुसार पीएं पाेषण विशेषज्ञ नुपूर कृष्णन के अनुसार किसी व्य्नित की जीवनशैली इस बात काे निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है कि उसे कितने पानी का सेवन करना चाहिए.
वह कहती हैं, ‘‘यदि आपकी जीवनशैली अस्त-व्यस्त है और आप वातानुकूलित वातावरण में काम करती हैं जहां पर पानी की कमी के लिए काेई स्थान नहीं हाेता वहां 2.5 लीटर पानी की सलाह नहीं दी जा सकती. यदि आप इतना पानी ऐसे वातावरण में पीती हैं ताे यह अंततः आपके गुर्दाें में इकट्ठा हाे जाएगा और एडीमा का कारण बनेगा. सेल्जपर्सन्स जैसे कर्मियाे के लिए जिन्हें शारीरिक गतिविधि की अधिक जरूरत पड़ती है, यह महत्वपूर्ण है कि वे 3 लीटर पानी का सेवन करें. इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि पानी की खपत संबंधी आदताें काे माैसम में परिवर्तन के अनुसार बदल देना चाहिए.
आपकी वाटर गाइड : साे कर उठने के बाद 2 से 4 गिलास पानी (लगभग 800 एम.एल.) अवश्य पीएं. यदि आप वातानुकूलित वातावरण में काम करती हैं और आपकी जीवनशैली अस्त-व्यस्त है ताे प्रतिदिन दाे से अढ़ाई लीटर पानी से अधिक का सेवन न करें.