खानपान में बदलाव से सूखे मिर्च के कारोबार में मंदी की स्थिति

मार्केट यार्ड में आवक 1,500 ट्रक से घटकर केवल 500 ट्रक; पैकेट वाले पिसे मसालों को ज्यादा तरजीह

    11-Aug-2026
Total Views |
 
bhfg
गुलटेकड़ी, 10 अगस्त (आ.प्र.)

पुणे में सूखी मिर्च की आवक पिछले एक दशक में काफी कम हो गई है. मार्केट यार्ड के व्यापारियों का कहना है कि मिर्च की वार्षिक आवक लगभग 1,500 ट्रक से घटकर अब केवल 500 ट्रक रह गई है. यह इसलिए है क्योंकि पुणे के रसोइयों में बड़ा बदलाव आ रहा है. अधिक से अधिक परिवारोंद्वारा बाजार में मिलने वाले पिसे हुए मिर्च पाउडर को अपनाएं जाने से शहर का पारंपरिक मिर्च व्यापार इसका असर महसूस कर रहा है. यह आंकड़ा पूरे शहर में खान-पान की आदतों में आए एक बड़े बदलाव को दर्शाता है.पुरानी पीढ़ियों में गर्मियों के दिनों में सूखे मिर्च, पापड़ और अचार की सामग्री जमा की जाती थी. परिवार पूरे मिर्च खरीदते थे, उनकी डंठल ाते थे, साले भूनते थे और सालभर के लिए मिर्च पाउडर तैयार करने के लिए पास पसाई मिलों के बाहर कतार होते थे. लेकिन, वह परंपरा अब तेजी से गायब हो रही है. ग्राहकों को सुपरमार्केट और ऑनलाइन आसानी से मिलने वाले पैक्ड मसालों की ओर मोड़ दिया है. जो काम कभी एक वार्षिक घरेलू परंपरा हुआ करता था, अब उसकी जगह किराना दुकान की एक छोटी सी यात्रा ने ले ली है. व्यापारियों का मानना है कि कामकाजी दंपत्तियों की बढ़ती संख्या, एकल परिवारों (न्यूक्लियर फैमिली) और अपार्टमेंट कल्चर के कारण, अब कई पुणेकर मिर्च की सफाई करने और उसे पीसने में घंटों बर्बाद नहीं करना चाहते. इसका असर सिर्फ घरेलू खपत तक ही सीमित नहीं है.  
बदलती जीवनशैली से मांग में गिरावट

मांग में तेज गिरावट की मुख्य वजह बदलती जीवनशैली है. लगभग 10 साल पहले, पुणे में आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र से सालाना लगभग 1,500 ट्रक मिर्च आती थी. अब, मुश्किल से 500 ट्रक ही आते हैं. इसके अलावा, अब मिर्च की नई-नई किस्में आ रही हैं. उनमें से ‌‘341‌’ नाम की मिर्च पाउडर बनाने के लिए सबसे ज्यादा पसंद की जा रही है. - राजेंद्र गुगले मिर्च व्यापारी, मार्केट यार्ड
 
 
bhfg
 
आने वाले समय में भी दाम नहीं बढ़ेंगे

वर्तमान में मिर्च के ग्राहक कम हैं, जिसके कारण बिक्री में भी गिरावट आई है. जाहिर है, भाव भी स्थिर बने हुए हैं. आंध्र प्रदेश में इस हफ्ते बारिश हुई है, जिससे बाजार में मंदी का रुख बना हुआ है. कुल स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि आने वाले समय में भी यही माहौल बना रहेगा और मिर्च के दाम नहीं बढ़ेंगे. - वालचंद संचेती मिर्च व्यापारी, मार्केट याड  
 
bhfg