भारत के चावल निर्यात में 5 प्रितशत की वृद्धि

गैर-बासमती क्षेत्र में वैेिशक बाजार में भारत का दबदबा : निर्यात बढ़कर 1.23 करोड़ टन पर पहुंचा

    12-Aug-2026
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गुलटेकड़ी, 11 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

जनवरी से जून 2026 के इन छह महीनों में भारत से चावल के निर्यात में 5% की वृद्धि हुई है. पिछले साल भारत से 1.17 करोड़ टन निर्यात हुआ था, जबकि इस साल चावल का निर्यात बढ़कर 1.23 करोड़ टन हो गया है. विशेष रूप से, भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका- ईरान युद्ध जैसी स्थितियों के बावजूद भारत ने अपने निर्यात की रफ्तार को मजबूती से बनाए रखा है.चावल निर्यात में भारत के मुख्य प्रतिस्पर्धी देश थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान हैं. हालांकि, इन तीनों देशों ने मिलकर जितनी निर्यात की है, उतनी अकेले भारत से हुई है. यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में होने वाले कुल चावल निर्यात का लगभग 40% हिस्सा अकेले भारत का है. पिछले साल नवंबर-दिसंबर के महीने में भारत में चावल का अच्छा उत्पादन हुआ. मांग से अधिक उत्पादन होने के कारण भारत ने इसका निर्यात किया. इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि वैेिशक स्तर पर भारतीय चावल की कीमतें थाईलैंड, वियतनाम और पाकिस्तान की तुलना में कम हैं. यद्यपि भारतीय बासमती चावल के निर्यात में गिरावट आई है, फिर भी गैर-बासमती चावल की मांग काफी मजबूत बनी रही. गैर-बासमती चावल के निर्यात में लगभग 9% की वृद्धि हुई है. गैर-बासमती चावल मुख्य रूप से बांग्लादेश, अफ्रीका, कैमरून और श्रीलंका जैसे देशों में निर्यात किया गया है. जुलाई 2026 से निर्यात में कुछ समस्याएं आई हैं. मुख्य रूप से माल भाड़े की दरों में अत्यधिक बढ़ोतरी हुई है और लॉजिस्टिक्स में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं. भारतीय निर्यातकों को इस मूल्य वृद्धि का भारी सामना करना पड़ रहा है. महत्वपूर्ण बात यह है कि कार्गो कंटेनर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं. ये दो बहुत बड़ी समस्या बनी हुई हैं.
 
सरकार निर्यातकों के लिए कार्गो विमान उपलब्ध कराए

चावल के परिवहन के लिए कुछ महीने पहले एक शिपमेंट भेजने का खर्च 1,500 से 2,000 डॉलर आता था. वह अब बढ़कर सीधे 7,000 से 7,500 डॉलर तक पहुंच गया है. विदेशी व्यापारियों को यह खर्च वहन योग्य न होने के कारण वे ऑर्डर नहीं दे रहे हैं. चावल के निर्यात में भाड़े का बहुत बड़ा खर्च आ रहा है. यदि अगले कुछ महीनों तक यही स्थिति बनी रही, तो निर्यात का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा. सरकार से अनुरोध है कि यदि हमें निर्यात चालू रखना है, तो इन समस्याओं का शीघ्र समाधान निकाला जाना चाहिए. सरकार को निर्यातकों के लिए कार्गो (मालवाहक जहाज/विमान) उपलब्ध कराने चाहिए. - धवल शाह, चावल निर्यातदार, (जयराज ग्रुप)