‌‘बीपीसीएल‌’ लगाएगा कम्प्रेस्ड बायोगैस संयंत्र

मनपा प्रशासन ने देवाची उरूली स्थित कचरा डिपो परिसर में जमीन का विकल्प रखा : कंपनी को परियोजना के लिए मिट्टी परीक्षण की अनुमति दी

    12-Aug-2026
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शिवाजीनगर, 11 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

 सरकारी कंपनी बीपीसीएलने केवल जमीन उपलब्ध कराने पर 300 टन कचरे से कम्प्रेस्ड बायोगैस परियोजना शुरू करने की तैयारी दर्शाई है. इसके अनुसार मनपा प्रशासन ने देवाची उरूली स्थित कचरा डिपो परिसर में जमीन का विकल्प सामने रखते हुए कंपनी को परियोजना के लिए मिट्टी परीक्षण की अनुमति दी है.  इस बीच, जब बीपीसीएल कंपनी ने 300 टन कचरे की निशुल्क प्रक्रिया करने की तैयारी दर्शाई है, तब क्या मनपा इतने ही कचरे के प्रसंस्करण के लिए शहर के बाहर परियोजना स्थापित कर 20 वर्षों के लिए 1 हजार 672 करोड़ रुपये खर्च वाली टेंडर पर प्रक्रिया करेगी? इससे पहले कचरा प्रसंस्करण की दरों का विरोध करने वाले विपक्षी दल इस टेंडर को लेकर क्या रुख अपनाएंगे? इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है. मनपा ने पिछले महीने 300 टन गीले कचरे से बायोगैस निर्माण परियोजना की टेंडर जारी की है. इस परियोजना के लिए टिपिंग शुल्क और परिवहन खर्च पहले ही वर्ष में लगभग 1 हजार 60 रुपये तक पहुंचने की संभावना है.इस परियोजना के लिए मूल्यवृद्धि सूत्र के अनुसार हर वर्ष दी जाने वाली लगभग 7 प्रतिशत मूल्यवृद्धि को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना पर करीब 1 हजार 672 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. हाल ही में मनपा प्रशासन ने 500 टन गीले और सूखे कचरे के प्रसंस्करण के लिए टेंडर खोले हैं. भूमि ग्रीन एनर्जी कंपनी इस निविदा में पात्र ठहरी है और दरों पर बातचीत के बाद इस कंपनी ने 500 टन कचरे के प्रसंस्करण के लिए 7 प्रतिशत मूल्यवृद्धि को ध्यान में रखते हुए 20 वर्षों के लिए 577 करोड़ रुपये की निविदा प्रस्तुत की है. इसमें 300 टन गीले और 200 टन सूखे कचरे का प्रसंस्करण किया जाएगा. इस निविदा के अनुसार परियोजना के लिए मनपा देवाची उरूली में जमीन उपलब्ध कराएगी, जबकि परियोजना स्थापित करने का खर्च ठेकेदार कंपनी को उठाना होगा.वहीं, बायोगैस निर्माण की परियोजना शहर से बाहर 75 किलोमीटर तक ठेकेदार निजी जमीन पर स्थापित करेगा. इस परियोजना को स्थापित करने के लिए महानगरपालिका 50 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता करेगी. इसके लिए 600 रुपये टिपिंग शुल्क और 7 रुपये प्रति टन प्रति किलोमीटर आने-जाने की दूरी के हिसाब से अर्थात 150 किलोमीटर के लिए परिवहन खर्च दिया जाएगा. इन दोनों को मिलाकर एक टन गीले कचरे के प्रसंस्करण पर 1 हजार 650 रुपये प्रति टन खर्च आएगा. हर वर्ष की मूल्यवृद्धि को ध्यान में रखते हुए 20 वर्षों के लिए यह खर्च करीब 1 हजार 672 करोड़ रुपये तक पहुंच रहा है.इस बीच, बीपीसीएल सरकारी पेट्रोलियम कंपनी ने केवल मनपा द्वारा जमीन उपलब्ध कराने की स्थिति में अपने खर्च पर और किसी भी टिपिंग शुल्क अथवा परिवहन खर्च के बिना 300 टन कचरे से बायोगैस प्रसंस्करण परियोजना स्थापित करने की तैयारी दर्शाई है. मनपा प्रशासन ने इसके लिए जमीन के विकल्प तलाशना शुरू कर दिया है और देवाची उरूली स्थित जमीन का विकल्प सामने रखा है. इसके अनुसार जमीन का मिट्टी परीक्षण करने की अनुमति भी बीपीसीएल कंपनी को दी गई है. गीले कचरे के प्रसंस्करण की परियोजनाओं की लागत को देखते हुए शहर के बाहर कचरे से बायोगैस निर्माण की परियोजना मनपा के लिए सफेद हाथी साबित होने वाली है. फिलहाल गीले कचरे से कम्प्रेस्ड बायोगैस निर्माण की एक भी परियोजना उल्लेखनीय रूप से सफल नहीं हुई है. मनपा ने इससे पहले सूस में नोबल कंपनी के सहयोग से कम्प्रेस्ड बायोगैस निर्माण परियोजना स्थापित की थी. उल्लेखनीय है कि, कई परेशानियों के बावजूद आठ वर्षों में मनपा की यह महत्वाकाक्षी परियोजना अब तक एक बार भी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो सकी है. ऐसे में क्या मनपा प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर अपने दरवाजे पर सफेद हाथी बांधेगा? जबकि, इससे पहले गीले कचरे की परियोजनाओं में टिपिंग शुल्क की दरों को लेकर आंदोलन करने वाले विपक्षी दल क्या रुख अपनाएंगे? इसको लेकर मनपा के गलियारों में उत्सुकता बढ़ गई है.