कर्मों से मुक्त होने के लिए जिनवाणी पर श्रद्धा रखो : श्री अभिषेक मुनिजी
12-Aug-2026
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कोथरुड़, 11 अगस्त (आ. प्र.) श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान, कोथरुड, पुणे में विराजित गुरु सुमति शिष्य, उपप्रवर्तक, तप दिवाकर गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी म. सा. ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, व्यक्ति जिनेंद्र भगवान की वाणी में श्रद्धा रखता है, उसमें रुचि रखता है, उसे सुनने की इच्छा रखता है तथा जिनवाणी को सुनकर उसके अनुरूप अपने जीवन को ढालने का प्रयास करता है, तो उसकी आत्मा धीरे-धीरे निर्मल होती जाती है. ऐसी आत्माएं कर्मों के बंधनों से मुक्त होकर शीघ्र ही संसार चक्र से छुटकारे की दिशा में आगे बढ़ती हैं. जिनेंद्र भगवान ने अपनी जिनवाणी के माध्यम से प्रत्येक जीव को उसकी क्षमता और सामर्थ्य के अनुरूप धर्म का पालन करने की प्रेरणा दी है. धर्म किसी पर बोझ नहीं है, बल्कि आत्मा को शुद्ध एवं निर्मल बनाने का सहज मार्ग है. मनुष्य जीवन में अनेक प्रकार के दुःखों का अनुभव करता है, लेकिन कुछ मूलभूत दुःख ऐसे हैं, जिन्हें आत्मा को संसार में रहते हुए भोगना ही पड़ता है. जब तक आत्मा आत्मधर्म की शरण में नहीं आती, तब तक जन्म-मरण के इस संसार चक्र से उसका छुटकारा संभव नहीं है. जिनेंद्र भगवान के वचन त्रिकाल सत्य होते हैं. जो व्यक्ति उन वचनों को सुनकर उनमें श्रद्धा रखता है और उनके अनुसार अपने जीवन में परिवर्तन लाते हुए भौतिक साधनों के मोह को कम कर त्याग एवं संयम के मार्ग पर आगे बढ़ता है, वह आत्मकल्याण की दिशा में निरंतर प्रगति करता हुआ संसार से मुक्ति की ओर अग्रसर होता है.