सोलापुर, 11 अगस्त (आ. प्र.)
महान् जैनाचार्य श्री रामचंद्र सूरीजी महाराज की 35वीं स्वर्गारोहण तिथि के निमित्त गुणानुवाद सभा का सोलापुर के श्री आदेश्वर जैन श्वेतांबर मंदिर मंगलवार (11 अगस्त) में आयोजन किया गया. गुरु स्तुति-स्तवना के साथ गुरु की प्रतिकृति पर पुष्पमाला-पूजा हुई. इस अवसर पर कनुभाई शाह, संदीप गोलछा, चेतन बाफना, रमेश दंड़ आदि अनेक श्रावक-भाइयों ने गुरुदेव के गुणों को दर्शाया. पू. मुनि प्रशांतरत्नविजयजी भगवंतों ने आचार्यश्री के अनेक जीवन प्रसंगों द्वारा गुरुदेवश्री का परिचय व उनके गुणों को प्रस्तुत किया. मुनिश्री ने कहा कि, महापुरुषों के गुणानुवाद से जीवन पवित्र बनता है. बाल्यावस्थ में संस्कार कैसे थे, युवावस्था में उनका सत्त्व कैसा था और प्रौढ़ावस्था में साधना के द्वारा समाधि भाव को कैसे सिद्ध किया था यह उन्होंने बताया. अपने तेजस्वी और प्रखर प्रवचनों के द्वारा महापुरुषों ने अनेक जीवों का कैसा परिवर्तन किया, उसे बताते हुए उन्होंने कहा कि, पारसमणि के स्पर्श से जैसा लोहा भी सुवर्ण बन जाता है वैसे महापुरुषों के योग से पापों से घिरी हुई आत्मा भी पवित्र बन जाती है. महापुरुषों की दुनिया विराट होती है, उनके गुणों की गरिमा बहुत ही ऊंचाई पर होती है, उससे ‘विराट व्यक्तित्व की पहचान’ प्रकट होती है. इस अवसर पर मुनिश्री द्वारा लिखी गई पुस्तक का भी विमोचन किया गया.