लाेग भी खूब अजीब हैं, पिछले जन्माें की बातें करते हैं कि पिछले जन्माें के कर्माें के फल मिल रहे हैं और इसी जन्म में जाे उपद्रव करते रहते हैं उनका गणित बिठाते नहीं! पिछला जन्म था कि नहीं, यह भी तुम्हें पता नहीं है.
मगर यह जन्म ताे साफ है. इसी जन्म में हिसाब जरा देखाे.
ईसाइयत ने दाे हजार साल तक मनुष्य काे समझाया कि ईश्वर से डराे. यह ताे बड़े अचंभे की बात है. बुद्ध धर्म बुद्ध के आधार से नहीं बना और न जैन धर्म महावीर के आधार से बना और न हिंदू धर्म कृष्ण के आधार से बना. और जैन धर्म महावीर के आधार से बना और न हिंदू धर्म कृष्ण के आधार से बना. इस जगत में बहुत अचंभे हैं, लेकिन सबसे बड़ा अचंभा यह है.
कबीरदास बहुत बार कहते हैं: एक अचंभा मैंने देखा नदिया लग गयी आगि.
कि नदी में आग लग गयी. कि मछली चढ़ गयी रूख, कि मछली वृक्ष पर चढ़ गयी.
मगर ये कुछ भी नहीं अचंभे. कबीरदास मुझे मिल जाएं ताे उनसे कहूं कि कबीर दास जी, ये काेई अचंभे नहीं. नदी में आग लग सकती है, इसमें क्या अड़चन? जरा पेट्राेल फेंक दाे और लगा दाे आग. अमरीका की झीलाें में आग लगती है.
अब बेचारे कबीरदास आ जाएं ताे उन्हें अपना वचन बदलना पड़े, क्याेंकि अमरीका की झीलाें में इतना तेल हाे गया है! माेटर-बाेट चल रही हैं, जहाज चल रहे हैं. इतना तेल फैल गया है सतह पर कि आग लग जाती है. अभी कुछ दिन पहले अमरीका की प्रसिद्ध झील में आग लग गयी. कबीरदास सुनते ताे भाैंचक्के रह जाते कि मैंने ताे कहा: एक अचंभा मैंने देखा, नदिया लग गयी आगि. अब वह अचंभा नहीं रहा.लेकिन असली अचंभा यह है कि महावीर काे मानने वाले महावीर के दुश्मन, बुद्ध काे मानने वाले बुद्ध के दुश्मन, जीसस काे मानने वाले जीसस के दुश्मन, कृष्ण काे मानने वाले कृष्ण के दुश्मन. यह सबसे बड़ा अचंभा है. मानने वाले हैं, लगता है प्रेम करने वाले लाेग हाेंगे. मगर कहीं काेई प्रेम नहीं, भय है.
इसलिए घृणा.
ईसाइयाें ने दाे हजार साल तक पश्चिम काे समझाया कि ईश्वर से डराे. जीसस ने कहा था: ईश्वर प्रेम है. जाे प्रेम है, उससे कहीं डरा जाता है? प्रेमी कहीं एक-दूसरे से डरते हैं? पति-पत्नी डरते हैं, क्याेंकि प्रेम नहीं हैं. पति डरता है कि कहीं पत्नी काे पता न चल जाए. घर क्या आता है, रास्ते भर हिसाब लगाता आता है- क्या-क्या जवाब देना, यह बाई क्या-क्या पूछेगी आज- कहां रहे, कहां गए! और इससे बचना मुश्किल है, क्याेंकि वह निकाल ही लेगी काेई तरकीब. वह फांस ही लेगी किसी जाल में. सब बचाव का इंतजाम करके पति घर में प्रवेश करता है और फाैरन फंस जाता है. देर नहीं लगती.
पत्नियां पतियाें से डरी हुई हैं. बच्चे मां- बाप से डरे हुए हैं. मां-बाप बच्चाें से डरे हुए हैं. शिक्षक बच्चाें काे डरा रहा है, बच्चे शिक्षकाें काे डरा रहे हैं. हर काेई हर काेई काे डरा रहा हैं. क्या समाज हमने बनाया है- भय पर खड़ा हुआ! अंग्रेजी में शब्द है- गाॅड-फीयरिंग. हिंदी में भी हमारे पास शब्द है- ईश्वर-भीरु. कैसे बेहूदे शब्द! धार्मिक व्यक्ति काे कहते हैं ईश्वर-भीरु, गाॅड-फीयरिंग. धार्मिक व्यक्ति काे कहना चाहिए- ईश्वर-प्रेम गाड-लविंग.