‌‘मेरे प्रभु सूं प्रगट्यो पूरन राग‌’ -यशोविजयसूरीजी म. सा. ने कहा

    13-Aug-2026
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गुरुवार पेठ, 12 अगस्त (आ. प्र.)

श्री गोड़ीजी पार्श्वनाथ जैन मंदिर स्थित भक्तियोगाचार्य यशोविजयसूरीजी म. सा. ने अपने प्रवचन में कहा कि, प्रीति और पूर्ण प्रीति - दोनों में फर्क है. प्रीति का अर्थ है कि प्रभु भी मुझे पसंद हैं और विभाव में जाना भी मुझे पसंद है. पूर्ण राग, पूर्ण प्रीति का अर्थ है कि Conscious Mind, Unconscious Mind, व्यक्तित्व, हृदय, अस्तित्व सब कुछ प्रभु से भर जाए; प्रभु के अलावा वहां कुछ भी न रहे. परम चेतना में डूब जाना है. संसार में बहुत डूबे; अब परमात्मा में डूबना है. इसके लिए तो हम आए हैं, आपको प्रभु में डुबाने के लिए. एक बार डूबोगे न परमात्मा में, तो फिर आपसे संसार में डूबा नहीं जाएगा. संसार में शायद रहना पड़ेगा, रहोगे, लेकिन डूबोगे नहीं. शरीर संसार में हो, पर मन तो परमात्मा में ही रहे. आपके लिए और भी अयादा Discount देता हूं. आपको व्यापार का गणित बिठाना है, Future Planning करना है, तो उसके लिए भले ही आपका Conscious Mind भी संसार में रहे, लेकिन आपका Unconscious Mind, आपकी अस्तित्व की धारा तो प्रभु में ही रहेगी.