चाकण में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से उद्यमी नाराज

कचरा, ट्रैफिक और पानी-बिजली की समस्या से भारी परेशानी : उद्योगों को सातारा ले जाने की चेतावनी

    13-Aug-2026
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chakan 
पुणे/चाकण, 12 अगस्त (आ.प्र.)
चाकण औद्याेगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली काे लेकर उद्यमियाें में नाराजगी बढ़ती जा रही है. कचरा, खराब सड़कें, यातायात जाम, सीवेज, पानी और बिजली की अनियमित आपूर्ति जैसी समस्याओं का समाधान नहीं हाेने पर कई उद्याेगाें के दूसरे क्षेत्राें में स्थानांतरित हाेने की स्थिति बन गई है. उद्यमियाें ने चेतावनी दी है कि यदि समस्याओं का तत्काल समाधान नहीं किया गया ताे वे अपने उद्याेगाें काे खंडाला-सातारा की ओर स्थानांतरित करने आगे बढ़ेंगे.
 
उद्यमियाें के अनुसार, चाकण औद्याेगिक क्षेत्र में हजाराें कराेड़ रुपये का काराेबार हाेता है और बड़ी संख्या में लाेगाें काे राेजगार मिलता है. उन्हाेंने दावा किया कि क्षेत्र की समस्याओं काे लेकर मुख्यमंत्री सहित विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियाें से कई बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक ठाेस समाधान नहीं निकला है.
 
खराब सड़काें और ट्रैफिक से उद्याेग प्रभावित उद्यमियाें ने चाकण की खराब सड़काें और जगह-जगह बने गड्ढाें काे लेकर भी चिंता जताई. उनका कहना है कि कई सड़काें की जिम्मेदारी किस विभाग की है, यह स्पष्ट नहीं हाेने के कारण विभाग एक- दूसरे पर जिम्मेदारी डालते हैं. संकरी सड़काें और अतिक्रमण के कारण यातायात जाम की समस्या गंभीर हाे गई है.
उद्यमियाें का दावा है कि कर्मचारियाें और विद्यार्थियाें काे कई बार घंटाें ट्रैफिक में फंसे रहना पड़ता है. इससे उद्याेगाें की कार्यक्षमता प्रभावित हाेने के साथ-साथ स्थानीय नागरिकाें काे भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
 
खंडाला-सातारा में जमीन देखने का दावा उद्यमियाें ने बताया कि पहले गुजराण क्षेत्र में जमीन देखने के बाद अब खंडालासातारा जिले में उद्याेग स्थानांतरित करने का निर्णय लिया गया है. करीब 20 सदस्याें की समिति ने इस संबंध में सहमति जताई है. उद्यमियाें का कहना है कि वे अपने कर्मचारियाें से भी चर्चा करेंगे और स्थानांतरण की स्थिति में माैजूदा कामगाराें के राेजगार पर प्रतिकूल असर न पड़े, इसका ध्यान रखा जाएगा.
 
उद्यमियाें ने सरकार से चाकण औद्याेगिक क्षेत्र की समस्याओं काे गंभीरता से लेने और उद्याेगाें के पलायन काे राेकने के लिए तत्काल ठाेस कदम उठाने की मांग की है.यातायात जाम की समस्या के संबंध में हमने मुख्यमंत्री काे तीन बार मेल भेजा. लेकिन उनकी ओर से काेई प्रतिक्रिया नहीं मिली. हमारी हालत आईसीयू के मरीज जैसी है. यातायात जाम, प्रदूषण, पानी और बिजली नहीं है, चलने के लिए सड़कें नहीं हैं. इसलिए हमने खंडाला एमआईडीसी जाने का फैसला लिया है, ऐसी भूमिका एक पत्रकार-वार्ता में चाकण की बीस कंपनियाें के मालिकाें और निदेशकाें ने रखी है.
 
इनमें कुणाल कड़, दिलीप बटवाल, शांतनु कुलकर्णी, जयदेव अ्नकलकाेटे और धनंजय शेडबाले शामिल हैं.