पुणे, 12 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) भारतीय खगोलविदों की नेतृत्व में शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने दो मरे हुए तारों की एक अजीब जोड़ी खोजी है. दोनों तारों के बचे हुए हिस्से सिर्फ छह मिनट में एक-दूसरे की एक प्रदक्षिणा(ऑर्बिट) पूरी करते हैं और उनकी कक्षा बहुत तेजी से सिकुड़ रहे हैं. इसलिए यह जोड़ी भविष्य में अंतरिक्ष में गुरूत्वाकर्षण का पता लगाने के लिए एक जशरी स्त्रोत हो सकती है? इस रिसर्च का नेतृत्व आयुका के वैज्ञानिक डॉ. राहुल शर्मा और प्रो. चंद्रेयी मैत्रा ने किया है. यह रिसर्च 10 अगस्त को द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल लेटर्स में पब्लिश हुई है. स्टार्स की यह जोड़ी दो व्हाइट ड्वार्फ स्टार्स से बनी है. सूरज जैसे स्टार्स का फ्यूल खत्म होने के बाद, पीछे बचा हुआ बहुत घना कोर व्हाइट ड्वार्फ होता है. इन दोनों स्टार्स के बीच की दूरी बहुत कम है और वे सिर्फ 374 सेकंड में एक-दूसरे का ऑर्बिट पूरा करते हैं. इस जोड़ी को सबसे पहले एक्स-रे स्पेस टेलीस्कोप के सर्वे से खोजा गया था. फिर, चीन और नासा के टेलीस्कोप से पिछले निरीक्षण को मिलाया गया. लगभग साढ़े तीन साल के निरीक्षण से पता चला कि इन तारों के ऑर्बिट बहुत तेजी से सिकुड़ रहे हैं. रिसर्चर्स के अनुसार, इस ऑर्बिट के सिकुड़ने का मुख्य कारण गुरूत्वाकर्षण के कारण होने वाला ऊर्जा की कमी होना है. यह भी माना जाता है कि इस जोड़ी में एक तारे से दूसरे तारे तक मटेरियल सीधे बह रहा है और उसकी सतह से टकरा रहा है. इस प्रक्रिया से दस लाख डिग्री से अयादा तापमान बनता है, जिससे तेज एक्स-रे रेडिएशन होता है.