बुधवार पेठ, 13 अगस्त (आ.प्र.) अतिरुद्र यज्ञ केवल एक पूजा नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रसार है. 11 ब्रह्मवृंदों (वैदिक विद्वानों) द्वारा 11 बार रुद्र का पाठ करने पर एक ‘लघुरुद्र’ पूरा होता है. ऐसे 11 लघुरुद्र मिलाकर 1 ‘महारुद्र’ बनता है, और 11 महारुद्र मिलकर 1 ‘अतिरुद्र’ बनता है. शुक्रवार (14 अगस्त) तक प्रतिदिन दोपहर में विद्वान ब्राह्मणों (ब्रह्मवृंद) की उपस्थिति में मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान जारी रहेंगे. शनिवार, 15 अगस्त को 33 करोड़ देवता याग व दुर्लभ वनौषधियों के साथ पूर्णाहुति होगी. श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई सार्वजनिक गणपति ट्रस्ट और सुवर्णयुग तरुण मंडल द्वारा आयोजित इस महायज्ञ में वेदमूर्ति नटराज शास्त्री सहित 65 ब्रह्मवृंद (वैदिक विद्वान) भाग ले रहे हैं. मान्यता है कि अतिरुद्र की इसी व्यापकता के कारण वातावरण शुद्ध होता है, हानिकारक जीवाणु नष्ट होते हैं और सभी प्रकार की बीमारियों से मुक्ति मिलती है. इसी उद्देश्य से, संपूर्ण वेिश में शांति और सद्भावना के निर्माण हेतु श्रीमंत दगडूसेठ हलवाई गणपति मंदिर में अतिरुद्र महायज्ञ का आयोजन किया है. यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सामूहिक आध्यात्मिक जागृति का लगातार 21 दिनों तक चलने वाला अतिरुद्र महायज्ञ है. वेदों के अनुसार, इस यज्ञ से व्यक्ति, परिवार और वेिश में संतुलन तथा शुद्धता आती है. ट्रस्ट के अध्यक्ष सुनील रासने ने बताया कि मंदिर में यह अतिरुद्र महायाग का 6वां वर्ष है. विभिन्न धार्मिक आयोजनों के माध्यम से वेिश कल्याण और निरोगी समाज के लिए प्रार्थना की जा रही है. मंदिर के सभा मंडप में एक भव्य हवन कुंड बनाकर यह अतिरुद्र हवन किया जा रहा है. सभी भक्तों से इस धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने का आग्रह है.