निष्क्रिय पड़े आधे मस्तिष्क को प्राणायाम से सक्रिय करें

    14-Aug-2026
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osho
अब वैज्ञानिक भी इस बात काे स्वीकार करते हैं कि मस्तिष्क का आधा हिस्सा बिलकुल निष्क्रिय पड़ा है. और बहुत चकित हाेते हैं कि क्या कारण हाेगा, क्याें मस्तिष्क का आधा हिस्सा बिलकुल निष्क्रिय है, किसी काम में नहीं आ रहा है? प्रकृति काेई चीज ऐसी पैदा नहीं करती जाे बेकाम हाे, पैदा करती है ताे काम हाेना ही चाहिए. आधा मस्तिष्क काम कर रहा है, आधा मस्तिष्क बिलकुल बंद पड़ा है. वही आधा मस्तिष्क सहस्रार के क्षण में सक्रिय हाेता है. उसी आधे मस्तिष्क से प्रार्थना जन्मती है. उसी आधे मस्तिष्क से ध्यान उपजता है. वह आधा मस्तिष्क तभी सक्रिय हाेता है, जब काेई बुद्धत्व काे उपलब्ध हाेता है, तब तक सक्रिय नहीं हाेता. ऐसा ही समझाे जैसे तुम्हारे घर में एक द्वार बंद है, और तुम कई बार साेचते हाे यह द्वार कहां खुलता हाेगा? और सब द्वार ताे तुमने देखे हैं, मगर यह द्वार किस दिशा में ले जाता है? पता नहीं किस गुा में, कहां ले जाता है? जाे व्यक्ति अपने भीतर थाेड़ासा खाेजबीन करेगा, उसे जल्दी ही सहस्रार के द्वार पर जिज्ञासा उठनी शुरू हाे जाएगी.
 
विज्ञान ताे अब इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि मस्तिष्क का आधा हिस्सा निष्क्रिय है; याेग ताे आज पांच हजार साल से यह कह रहा है कि मस्तिष्क का आधा हिस्सा निष्क्रिय है.
 
उसकाे सक्रिय करने के बहुत उपाय किए हैं याेग ने. अनेक आसन खाेजे हैं. उस आधे काे सक्रिय करने के लिए ही शीर्षासन का उपयाेग किया गया है, ताकि खून की धारा उस आधे मस्तिष्क काे जाकर चाेट करने लगे, उसे सक्रिय करे.
 
श्वास की प्रक्रियाएं विकसित की गई हैं. क्याेंकि मस्तिष्क का भाेजन आक्सीजन है, मस्तिष्क जीता है आक्सीजन पर. जितनी ज्यादा प्राणवायु तुम लेते हाे, उतना ही मस्तिष्क सक्रिय हाेता है. इसलिए रात अगर तुम साेने के पहले पंद्रह मिनिट प्राणायाम कर लाे, िफर रातभर न साे सकाेगे मस्तिष्क सक्रिय हाे जाएगा. इसलिए रात भूल कर भी प्राणायाम नहीं करना चाहिए, या विपस्सना जैसी ध्यान की विधि रात में नहीं करनी चाहिए, अन्यथा नींद खराब हाे जाएगी.
ये सुबह की विधियां हैं, सूरज के उगने के साथ करनी चाहिए.