येरवड़ा, 13 अगस्त (आ.प्र.) केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के तहत डेक्कन कॉलेज द्वारा आयोजित भाषाविज्ञान विषय पर तीन हरते के कोर्स का उद्घाटन हाल ही में हुआ. इस कोर्स की संकल्पना केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी की है. कोर्स के उद्घाटन समारोह में अलग-अलग एकेडमिक फील्ड के जाने-माने स्कॉलर मौजूद थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता डेक्कन कॉलेज के वाइस चांसलर प्रो. प्रसाद जोशी ने की. भाषावैज्ञानिक प्रो. सोनल कुलकर्णी-जोशी प्रमुख अतिथि थीं, जबकि डेक्कन कॉलेज के रजिस्ट्रार डॉ. अभिजीत दांडेकर भी शामिल हुए. इस मौके पर प्रो. सोनल कुलकर्णी- जोशी ने भारत में आधुनिक भाषाविज्ञान की औपचारिक शिक्षा शुरू करने में संस्थान के भाषा विज्ञान विभाग की अग्रणी भूमिका पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि इस लंबी परंपरा की पृष्ठभूमि में इस संस्थान में वर्तमान शिविर का आयोजन संस्थान की शैक्षिक और अनुसंधान विरासत के अगले युग की शुरुआत है. कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. प्रसाद जोशी ने इस ग्रीष्मकालीन पाठ्यक्रम की अवधारणा और इसके पीछे व्यापक शैक्षिक भूमिका को समझाया. उन्होंने डेक्कन कॉलेज में विभिन्न विषयों पर ग्रीष्मकालीन और शीतकालीन पाठ्यक्रमों की परंपरा को पुनर्जीवित करने का भी ओशासन दिया. इस पहल की मुख्य विशेषता प्राचीन भारतीय भाषाई चिंतन और आधुनिक भाषाई सिद्धांत के बीच अंतःक्रिया लाकर भाषा का एक बहुआयामी और अंतः विषय अध्ययन करना है. अगले तीन हफ्तों में होने वाली अकादमिक चर्चाएं प्रतिभागियों को भाषाविज्ञान में विभिन्न दृष्टिकोणों, शोध विधियों और अध्ययन के नए क्षेत्रों से परिचित कराएंगी.