हड़पसर, 14 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) वेिश अंगदान दिवस के अवसर पर नोबल हॉस्पिटल्स एंड रिसर्च सेंटर द्वारा अंगदाता आभार सम्मान 2026 कार्यक्रम का विशेष आयोजन किया गया. हड़पसर स्थित नोबल हॉस्पिटल के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में अंगदाताओं का स्मरण किया गया और उनके परिजनों ने अपने अनुभव साझा किए. इसके साथ ही, एक अन्य कार्यक्रम में अंग प्राप्तकर्ताओं का भी सम्मान किया गया. इस दौरान प्राप्तकर्ताओं ने अपने अनुभव बताते हुए कहा कि अंग प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के बाद भी व्यक्ति एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है. इस अवसर पर कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जेडटीसीसी पुणे की समन्वयक आरती गोखले उपस्थित थीं. उनके साथ ही नोबल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. दिलीप माने, उप प्रबंध निदेशक डॉ. दिविज माने, समूह मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. संजय पठारे, वरिष्ठ प्रबंधन सदस्य, कर्मचारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे. कार्यक्रम में अंगदाताओं के परिवारों ने उस महत्वपूर्ण क्षण के अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने यह भावना व्यक्त की कि भले ही हमारे परिवार का सदस्य अब हमारे साथ नहीं है, लेकिन वह समाज में आज भी जीवित है. हमें इस बात का संतोष है कि उन्होंने किसी को नया जीवन दिया है. डॉ. संजय पठारे ने कहा कि, यह कार्यक्रम अंगदान करने वालों के परिवारों का आभार व्यक्त करने और उन्हें सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया था. अंगदान से न केवल मरीजों को, बल्कि उनके परिवारों को भी एक नई उम्मीद और नया जीवन मिलता है. इस अवसर पर नोबल हॉस्पिटल की नर्सों और कर्मचारियों ने अंगदान के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक मूक नाटक प्रस्तुत किया. इस दौरान मेडिकल सोशल वर्कर महेश तुपे को सम्मानित किया गया. मेडिकल डायरेक्टर डॉ. मनीषा पाठक ने आभार व्यक्त किया.
अंगदान के प्रति जागरूकता पैदा करना सामूहिक प्रयास
जेडटीसीसी पुणे की समन्वयक आरती गोखले ने कहा, 12 अप्रैल 1997 को पुणे में हुए पहले और महाराष्ट्र के दूसरे ‘ब्रेन डेड’ दाता द्वारा किए गए अंगदान की मैं गवाह रही हूं. उस समय मरीज के परिजनों को ‘ब्रेन डेड’ की अवधारणा समझाना बहुत मुश्किल काम था. समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता पैदा करने में काफी समय लगा. जागरूकता फैलाना किसी एक व्यक्ति का काम नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक प्रयास है.