
पुणे, 14 अगस्त (आ.प्र.)
हिंदी गजल के प्रमुख हस्ताक्षर दिल्ली के, दीक्षित दनकौरी ने पुणे प्रवास के दौरान बुधवार, 12 अगस्त को महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के पदाधिकारियों तथा पुणे के साहित्यकारों से आत्मीय मुलाकात की. इस अवसर पर हिंदी भाषा, साहित्य, पत्रकारिता और भारतीय भाषाओं के पारस्परिक संबंधों से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक संवाद हुआ. बाजीराव रोड स्थित हिंदी भवन कार्यालय में आयोजित इस विशेष मुलाकात में दनकौरी ने कहा कि पूरे देश में कुछ हजारों में ही वास्तव में पढ़ने -लिखने वाले होंगे. हर शहर में कुछ सौ लोग रचनाकर्म को लेकर संजीदा होते हैं. उन्होंने रचनाकारों की श्रेष्ठता प्रतिस्थापित करते हुए कहा कि आज जो लोग यहां आए हैं, वे अपने सारे काम, रूटीन, मनोरंजन, घर-परिवार को छोड़कर साहित्यिक संगोष्ठी में आए. इन रचनाकारों को लगा कि उन्हें अपने समय का अधिक सदुपयोग किसी रचनात्मक चर्चा में बिताकर करना चाहिए, न कि तमाम दीगर बातों में. शहर के साहित्यकारों ने दनकौरी का स्वागत करते हुए उन्हें पुणे की साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी दी. समिति के कार्याध्यक्ष डॉ. सुनील देवधर ने समिति की पत्रिका ‘समिति संवाद’ दनकौरी सहित सभी उपस्थितों को भेंट करते हुए संवाद साधा. अतिथि का स्वागत संस्था के उपाध्यक्ष सदानंद महाजन ने किया. इस अवसर पर प्रदीप निफाड़कर, डॉ. रमेश गुप्त मिलन, डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव, सुमित पॉल, इंदिरा शबनम, स्वरांगी साने, आशीष मुजुमदार, बंडोपंत पाटिल, जयश्री पाटिल, अनिता निफाड़कर, विजय रणदिवे, दिलीप कुमार दर्श सहित कई साहित्यप्रेमी उपस्थित थे.