सीजेपी का संसद मार्च गैरकानूनी था : दिल्ली पुलिस

सुप्रीम कोर्ट में कहा- हिस्ट्रीशीटर शामिल हुए, बैरिकेड तोड़े, लेकिन हमने ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया

    19-Aug-2026
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नई दिल्ली, 18 अगस्त (वि.प्र./वार्ता)
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार काे सुप्रीम काेर्ट में कहा कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था. इसकी परमिशन नहीं थी. जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कई हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे. पुलिस ने बताया कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारियाें ने बैरिकेड ताेड़े और पुलिस से मारपीट की, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा. हालात संभालने के लिए बल प्रयाेग किया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारियाें पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयाेग नहीं किया गया.
 
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर ये जानकारी दी. इसे पुलिस ज्यादती की काेर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं के जवाब के ताैर पर पेश किया गया है.
 
चार संबंधित याचिकाओं में भी यही जवाब इस्तेमाल हाेगा. 20 जुलाई काे जंतर-मंतर के आसपास 30 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी माैजूद थे. करीब 3 किलाेमीटर के इलाके में फैली इस भीड़ काे संभालने के लिए लगभग 5 हजार पुलिसकर्मी तैनात थे. झड़प में 240 से ज्यादा पुलिसकर्मी और करीब 200 प्रदर्शनकारी घायल हुए.
 
याचिकाओं में चुनिंदा फाेटाे, अधूरे वीडियाे और अपुष्ट मीडिया रिपाेर्ट्स का इस्तेमाल किया गया. इनमें पुलिस की कार्रवाई का पूरा संदर्भ नहीं दिखता. वीडियाे में ऐसी लाठी की सिर्फ एक घटना दिखती है. वह लाठी एक प्रदर्शनकारी के हाथ में थी.
 
प्रदर्शनकारियाें ने बैरिकेड ताेड़े, पुलिसकर्मियाें से मारपीट की और उनका सुरक्षा सामान खींचा. इसके बाद हिंसा राेकने के लिए कानूनी तरीके अपनाए गए. बल प्रयाेग जरूरी हाे गया था. भीड़ नियंत्रित करने के लिए लाठियां मान्य उपकरण हैं. स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस के जवान सिविल ड्रेस में भीड़ में तैनात थे.