‌‘पूरन मन, पूरन सब दीसे‌’ - यशोविजयसूरीजी म. सा.

    19-Aug-2026
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 गुरुवार पेठ, 18 अगस्त (आ. प्र.)

श्री गोड़ीजी पार्श्वनाथ जैन मंदिर स्थित भक्तियोगाचार्य यशोविजयसूरीजी म. सा. ने अपने प्रवचन में कहा कि, मुझे आपकी दृष्टि को बदलना है; आपके मन को बदलना है जिससे कि आप पूर्ण आनंद में रह पाएं. अगर आपके मन में प्रभु बस गए, प्रभु का प्रेम बस गया, मन पूर्ण हो गया, तो फिर आपको सब पूर्ण ही दिखेगा. मन पूर्ण हो जाए, तब पूरी दुनिया पूर्ण दिखती है. किसी का दोष आपको दिखता है, वह आपकी दोष-दृष्टि के कारण दिखता है. आप बड़े प्रबुद्ध हैं इसलिए औरों में जो राग-द्वेष-अहंकार हैं, वे सब आपको दिखते हैं, लेकिन प्रबुद्धता का यह उपयोग सही नहीं है. अपने भीतर झांकोगे तब आप को दिखेगा कि औरों में तो एकाध दोष है, मुझ में तो सब दोष भरे हुए हैं. मन पूर्ण हो जाए फिर आप घटनाओं के प्रति सर्वस्वीकार में रहते हैं. अभी तो आप पहले से निश्चित करते हैं कि यह घटना ऐसे ही घटित होनी चाहिए. फिर घटना आप की अपेक्षा से अलग घटित हो, तो आप नाराज हो जाते हैं. अगर जैसी भी घटना घटित हो, उसे आप स्वीकार कर लें, तो क्या होगा? आप सदैव आनंद में रहेंगे.