श्रेष्ठ पुरुष का अर्थ है, जाे बुद्धत्व काे उपलब्ध हुआ, जिसके भीतर का बाेध जागा, जिसके जीवन में किरणें फैलीं, जिसके भीतर का दीया जला और अब जिसका जीवन एक राेशनी है. इस राेशनी के बाद तुम जाे भी कराेगे उस सबमें श्रेष्ठता आ जाएगी. तुम जाे भी कराेगे वह श्रेष्ठ हाे जाएगा. तुम मिट्टी छुओगे, साेना हाे जाएगी. तुम्हारा स्पर्श अमृत का स्पर्श हाे जाएगा. और तब तुम्हारे लिए काेई कितना ही दुख दे, काेई कितनी ही पीड़ा दे, इससे कुछ फर्क न पड़ेगा, तुम्हारी श्रेष्ठता काे काेई डिगा न सकेगा.
जिसने इंसानाें की तकसीम के सदमे झेले, फिर भी इसी की अखाैवत का परस्तार रहा यह बुद्धत्व की परिभाषा है आदमियाें ने जिसे सताया परेशान किया.. फिर भी उसकी अनुकंपा अकंप रही. फिर भी आदमी का भला हाे, यही उसकी आकांक्षा रही.
जीसस काे सूली पर लटकाया, ताे भी आखिरी समय जीसस ने यही कहा हे प्रभु, इन्हें क्षमा कर देना, क्याेंकि ये नहीं जानते क्या कर रहे हैं. और जिनके लिए वह क्षमा मांग रहे थे, वे पत्थर फेंक रहे थे, सड़े गले फल फेंक रहे थे, गंदगी फेंक रहे थे, जूते फेंक रहे थे. जितना अपमान हाे सकता था जीसस का, कर रहे थे. मरते हुए आदमी के साथ दुर्व्यवहार कर रहे थे जीते जी भी दुर्व्यवहार किया, मरते क्षण में भी उनकाे दया न आयी.
जीसस काे प्यास लगी है, सूली पर लटके हैं वह सूली जाे यहूदी देते थे उन दिनाें, आदमी जल्दी नहीं मरता था; हाथ ठाेंक चेते, पैर ठाेंक देते कीलाें से, कभी छह घंटे लगते मरने में, कभी आठ घंटे लगते, कभी आदमी चाैबीस घंटे लटका रहता, खून बहता रहता, जब सारा खून बह जाता. शरीर से तब आदमी मरता, वह आजकल जैसी सूली नहीं थी जाे क्षण में हाे जाती है, बड़ी पीड़ादायी थीताे खून बहने लगा है उनकी देह से और बड़ी गहरी प्यास लगी. लगती है प्यास, जब खून बहेगा ताे पानी कम हाेने लगता है, क्याेंकि खून के साथ शरीर का पानी बहने लगता है.
ताे उन्हें बड़ी तीव्र प्यास लगी है, उनका कंठ जल रहा है प्यास से, भरी दुपहरी है और उन्हाेंने जाेर से चिल्लाकर कहा कि मुझे प्यास लगी है. ताे किसी ने गंदी नाली में एक मशाल डालकर मशाल बुझा दी और मशाल के ऊपर जाे गंदगी लग गयी, पानी लग गया नाली का, वह उठाकर जीसस के चेहरे के पास कर दिया कि इसे चाट लाे, इससे थाेड़ी प्यास बुझ जाएगी. इनके लिए वह प्रार्थना कर रहे हैं कि हे प्रभु, इन्हें क्षमा कर देना, क्याेंकि ये जानते नहीं कि ये क्या कर रहे हैं.