मजाक अकारण नहीं, इसके पीछे 'ईर्ष्या' है

    20-Aug-2026
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osho 
हम मजाक भी अकारण नहीं उड़ाते. अक्सर ताे ऐसा हाेता है कि हम मजाक उन्हीं का उड़ाते हैं जिनसे हमें ईर्ष्या हाेती है. जैसे तुम पाओगे, कुछ लाेगाें का मजाक पूरे मुल्क में उड़ाया जाता है.
उसका कारण है : उनसे से ईर्ष्या है. ईर्ष्या का कारण भी साफ है : वह तुमसे ज्यादा मजबूत है.
गर्दन दबा दे ताे तुम्हारी चीं बाेल जाए !
 
ताे पूरे भारत में काेई पास में खड़ा हाे ताे तुम्हें बेचैनी ताे हाेती है, कि यह आदमी ज्यादा ताकतवर है, अब इससे बदला कैसे लाे ? इससे झगड़ा-झांसा करने में सार नहीं है. ताे हम मजाक उड़ाते हैं, हम मखाैल उड़ाते हैं. वह मखाैल झूठ है. वह ईर्ष्या के कारण है.
पश्चिम में यहूदियाें का मजाक उड़ाया जाता है.
 
जितनी मजाकें हैं, यहूदियाें के खिलाफ हैं. उसके भी पीछे कारण हैं. यहूदी की प्रतिभा से बड़ी ईर्ष्या है. जहां यहूदी पैर रख दे, वहां से दूसराें काे हट जाना पड़ता है. जितनी नाेबल प्राइज यहूदियाें काे मिलती है उतनी दुनिया में किसी काे नहीं मिलती.
एक तरफ सारी दुनिया और एक तरफ यहूदी अकेले.
 
उनकी संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन नाेबल प्राइज वे इतनी जीत ले जाते हैं कि चकित हाेना पड़ता है कि मामला क्या है ? इस सदी काे जिन तीन लाेगाें ने प्रभावित किया है, वे तीनाें के तीनाें यहूदी थे- मार्क्स, ्रायड, आइंस्टीन. यह सारी सदी यहूदियाें के आधार पर चल रही है. हिटलर इसीलिए कम्युनिज्म के खिलाफ था, क्याेंकि वह कहता था कि यह भी यहूदियाें का षड्यंत्र है.
 
यह जाे मार्क्स है, इसने एक नई तरकीब निकाली है दुनिया पर कब्जा करने की, मगर आधी दुनिया पर कब्जा कर भी लिया है. िफर ्रायड है, उसने सारे मनाेविज्ञान पर कब्जा कर लिया है. आदमी के मनस के संबंध में मालिक हाे गया है.
 
उधर अलबर्ट आइंस्टीन है, उसने सारे विज्ञान पर कब्जा कर लिया है. यहूदी जहां पैर रख दे- राजनीति में रखे ताे राजनीति में, बाजार में रखे, धन की दाैड़ में रखे ताे धन में- वह सब जगह पराजित कर देता है लाेगाें काे. उसके पास प्रतिभा है.