‘संत हृदय नवनीत समाना’ यशोविजयसूरीजी ने प्रवचन में कहा
20-Aug-2026
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गुरुवार पेठ, 19 अगस्त (आ. प्र.) श्री गोड़ीजी पार्श्वनाथ जैन मंदिर स्थित भक्तियोगाचार्य यशोविजयसूरीजी म. सा. ने अपने प्रवचन में कहा कि, संतों की एक Identity है, एक पहचान : संत हृदय नवनीत समाना. उनका हृदय मक्खन जैसा कोमल-कोमल होता है. प्रभु का प्रेम जिन्हें मिला, उनका हृदय तो कोमल ही होगा. आपको भी अगर प्रभु का ध्यान करना है, तो आपका हृदय भी कोमल होना चाहिए. हमारे यहां भारत में Heart का अर्थ सिर्फ Blood Pumping Machine नहीं है. भारत में हृदय की व्याख्या है - जो संवेदनाओं को ले सके और दे सके. संवेदनाओं के आदानप्रदान का जो तंत्र है, उसको हमारे भारत में हम हृदय कहते हैं. यदि हृदय में परमात्मा की प्रतिष्ठा न हुई, तो हमारा यह जन्म Meaningless है, निरर्थक है. यह जन्म सार्थक तभी होता है, जब हमारे हृदय में प्रभु की प्रतिष्ठा हो जाए और प्रभु के आते ही मन पूर्ण हो जाता है; कोई अपूर्णता नहीं रह जाती. पूरन मन, पूरन सब दिसे, नहीं दुविधा को लाग.