कोथरुड़, 19 अगस्त (आ. प्र.) श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान, कोथरुड, पुणे में विराजित गुरु सुमति शिष्य, उपप्रवर्तक, तप दिवाकर गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी म. सा. ने संघ संरक्षक, बहुश्रुत योगीराज गुरुदेव स्वामी श्री फूलचंदजी म. सा. के दीक्षा शताब्दी वर्ष के अंतर्गत आयोजित शिखर दिवस के अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, जो अपने लिए जीते हैं, उनका मरण होता है और जो दूसरों के लिए जीते हैं, उनका सदैव स्मरण होता है. दादा गुरुदेव श्री फूलचंदजी म. सा. ऐसे संत एवं महापुरुष थे, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन संघ और समाज के लिए समर्पित कर दिया. वे अदम्य साहस और वीरता के धनी थे. उनका हृदय अत्यंत सरल, संवेदनशील और दयालु था. उनके पास अपनी समस्या लेकर आने वाला कोई व्यक्ति निराश होकर नहीं लौटता था; वे प्रत्येक व्यक्ति को समाधान, सहारा और धर्म की प्रेरणा प्रदान करते थे. गुरुदेव ने कहा कि जिस समय भारत का जनमानस विभाजन की पीड़ा और भय से व्याकुल था, उन विषम परिस्थितियों में भी दादा गुरुदेव ने समाज को महामंत्र नवकार और धर्म की शरण लेने की प्रेरणा दी. वे जिनशासन के निडर, निर्भीक और सजग प्रहरी थे. इस अवसर पर उपप्रवर्तक श्री आशीष मुनिजी ने कहा कि जो व्यक्ति अपने जीवन की परवाह किए बिना केवल संघ और समाज के हित के विषय में सोचता है तथा अपने जीवन का मूल्य चुकाकर भी संघ की रक्षा करता है, वही सच्चे अर्थों में संघ संरक्षक कहलाता है. गुरुदेव श्री फूलचंदजी म. सा. ऐसे ही निष्काम योगी थे.