गुलटेकड़ी, 20 अगस्त (आ. प्र.) श्री श्रावस्ती जैन संघ, गुलटेकड़ी, पुणे में गुरुवार (20 अगस्त) को श्रुतरत्न संशोधन संस्थान, पुणे द्वारा प्रकाशित ग्रंथों का श्रद्धापूर्वक संघार्पण एवं विमोचन समारोह प. पू. आचार्यदेव श्री विजय मुनिचंद्रसूरेीशरजी म. सा. तथा श्रुतरत्न प. पू. गणिवर्य श्री वैराग्यरतिविजयजी म.सा. की पावन निश्रा में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ. समारोह को संबोधित करते हुए पूज्य आचार्यदेव ने प्राचीन जैन हस्तप्रतों के संरक्षण, संपादन एवं संशोधन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, शास्त्रों की रक्षा ही जिनशासन की सांस्कृतिक विरासत की रक्षा है. उन्होंने श्रुतरत्न संशोधन संस्थान द्वारा किए जा रहे अनुसंधान एवं प्रकाशन कार्य की सराहना की. अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में गणिवर्य श्री वैराग्यरतिविजयजी म. सा. ने कहा कि, वेिश में सर्वाधिक ज्ञान-संपदा जैन धर्म के पास है जो प्राचीन हस्तप्रतों में निहित है. इस अमूल्य ज्ञान का संरक्षण और प्रकाशन केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि आने वाले हजारों वर्षों तक जिनशासन एवं समग्र मानवता के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा. उन्होंने समाज से इस दिशा में अधिक जागरूकता और सहयोग का आह्वान किया.कार्यक्रम में श्रुतरत्न संशोधन संस्थान की विविध शोध एवं प्रकाशन गतिविधियों का परिचय आशेष कांकरिया ने कराया. प्राचीन हस्तप्रति, लेखन सामग्री एवं संस्थान के प्रकाशन साहित्य की प्रदर्शनी का आयोजन भी इस अवसर पर किया गया था.