कोथरुड़, 20 अगस्त (आ. प्र.) श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान, कोथरुड, पुणे में विराजित गुरु सुमति शिष्य, उपप्रवर्तक, तप दिवाकर गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी म. सा. ने कहा कि, जो दिन-रात और क्षण बीत जाते हैं, वे कभी लौटकर नहीं आते. संसार में कोई व्यक्ति कितना भी शक्तिशाली और सामर्थ्यवान क्यों न हो, बीते हुए क्षण को वापस लाने की शक्ति किसी में नहीं है. समय इसलिए अनमोल है, क्योंकि जीवन का प्रत्येक क्षण केवल एक बार आता है. जो समय धर्म, साधना, तप, स्वाध्याय और सत्कर्मों में व्यतीत होता है, वही जीवन को सार्थक बनाता है. इसके विपरीत जो समय पाप, प्रमाद और अधर्म में व्यतीत हो जाता है, वह केवल समय की ही नहीं, बल्कि जीवन की भी हानि है. जैन दर्शन में समय की जितनी सूक्ष्म एवं गहन विवेचना की गई है, वह अन्यत्र दुर्लभ है. ज्ञानियों ने समय की सूक्ष्मता को समझाते हुए बताया है कि, जितने समय में हम ‘समय’ शब्द का उच्चारण करते हैं, उतनी अवधि में भी असंख्यात समय व्यतीत हो जाता है, इसलिए प्रत्येक क्षण के प्रति सजग रहना आवश्यक है. परमात्मा की प्रेरणा है कि एक क्षण मात्र भी व्यर्थ न गंवाएं और समय के प्रति प्रमाद न करें. जो व्यक्ति अपने समय को सफल बना लेता है.