बेंगलुरु, 21 अगस्त (वि.प्र.)
कर्नाटक हाईकाेर्ट ने कहा है कि काेई भी व्यक्ति चाहे पुरुष हाे या महिला, और इसमें नाैकरी-पेशा लाेग भी शामिल हैं जाे बिना थके काेशिश करता है, बिना किसी शर्त के प्यार देता है.
कभी-कभी अपनी निजी सुख-सुविधाओं का त्याग करता है और आखिरकार एक खुशहाल और स्थिर परिवार का आधार बनता है, वह हाेममेकर (घर संभालने वाला) है.
काेर्ट ने कहा कि किसी महिला काे हाेममेकर मानने के लिए यह साबित करना या दिखाना ज़रूरी नहीं है कि वह अनपढ़ है, 24 घंटे घर पर रहती है, या सिर्फ घर के काम करती है और कुछ नहीं.
अदालत ने कहा कि जाे महिला घर पर अपने परिवार की देखभाल करती है, उसे उसकी पढ़ाई-लिखाई की याेग्यता के बावजूद हाेममेकर (घर संभालने वाली) माना जा सकता है.
अदालत ने कहा, हमारी विनम्र राय में, नाैकरी करने वाली महिला या प्राेफेशनल काे भी हाेममेकर माना जा सकता है, बशर्ते वह घर पर परिवार के सदस्याें की देखभाल और भलाई का काम करती हाे... हाेममेकर शब्द जेंडर-न्यूट्रल (स्त्री-पुरुष दाेनाें के लिए समान) है. हाेममेकर पुरुष या महिला काेई भी हाे सकता है.
इस शब्द में नाैकरी करने वाला व्यक्ति, परिवार का भरण-पाेषण करने वाला या वेतन पाने वाला व्यक्ति भी शामिल है.
अदालत ने यह टिप्पणी एक वाहन दुर्घटना में मुआवज़े से जुड़े मामले की अपील पर सुनवाई करते हुए की. मामला यह था कि क्या पश्चिम बंगाल की एक महिला जिसके पास मास्टर डिग्री थी और जिसने कुछ समय के लिए गेस्ट लेक्चरर के ताैर पर काम किया था उसकाे दुर्घटना में लगी चाेटाें के कारण काम न कर पाने की अवधि के दाैरान भविष्य की कमाई के नुकसान के लिए मुआवज़ा तय करते समय हाेममेकर माना जा सकता ह