प्रभु ही साधना का आनंद देते हैं : यशोविजयसूरीजी

    23-Aug-2026
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गुरुवार पेठ, 22 अगस्त (आ. प्र.)
 श्री गोड़ीजी पार्श्वनाथ जैन मंदिर स्थित भक्तियोगाचार्य यशोविजयसूरीजी म. सा. ने अपने प्रवचन में कहा कि, हमारी साधना का एक केंद्र बिंदु है कि साधना का पूरा का पूरा कर्तृत्व प्रभु का है, सद्गुरु का है, हमारा नहीं है. फिर साधना आपकी भले ही छोटी सी हो, उसका आनंद गहरा होगा. साधना भी प्रभु ने दी, साधना का आनंद भी प्रभु ने दिया, सब कुछ प्रभु का. जब आप प्रभु की आज्ञा के अनुसार ‌‘ईर्यासमिति‌’ (रास्ते में चलते हुए भी हिंसा न हो) पूर्वक चलने की साधना करते हो, तो उसका आनंद आपको मिलता ही है. ‌‘ईर्यासमिति की एक शर्त है कि, चलते समय तुम न कोई माला गिन सकते हो, न कोई गाथाओं को रट सकते हो; मन में शुभ विचार भी नहीं कर सकते. केवल एकाग्र होकर रास्ते को देख सकते हो. जब आप ‌‘ईर्यासमिति‌’पूर्वक चलते हैं तो एक तो प्रभु की आज्ञा का पालन होता है. दूसरा दृष्टिसंयम मिलता है. आंखों को कहां Focus रखना है, उसका नियंत्रण आपके हाथ में आ जाता है और तीसरी बात यह होती है कि आप निर्विकल्प हो जाते हो.