पुणे, 23 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) दिमागी नक्सलवाद वास्तविक खतरा है. किसान, मजदूर,आदिवासी और विद्यार्थी दिमागी नक्सलवाद के शिकार हो रहे हैं. वास्तविकता में दिमागी नक्सलवाद समाज का विखंडन करनेवाली सोच है. ज्यादातर विद्यार्थी इसके लक्ष्य(टार्गे ट) पर हैं. दिमागी नक्सलवादी सोच के लोग विद्यार्थियों का हथियार(टूल)जैसा इस्तेमाल कर रहे हैं. इसलिए विद्यार्थियों को अपने बुद्धि का सही उपयोग करने की जरूरत है, यह विचार बस्तर के निवासी तथा नक्षलवाद के अध्ययनकर्ता और लेखक राजीव रंजन प्रसाद ने व्यक्त किए. वेिश संवाद केंद्र और डेक्कन एजुकेशन सोसायटी की ओर से मीडिया में उल्लेखनीय कार्य करनेवाले पत्रकारों को,आद्य पत्रकार देवर्षि नारद माध्यम पत्रकारिता पुरस्कार से नवाजा जाता है. शनिवार को फर्ग्यूसन कॉलेज के एम्फी थिएटर में सुबह 11 बजे हुए कार्यक्रम में, नक्सलवाद कल और आज इस विषय पर राजीव रंजन प्रसाद बोल रहे थे. इस वर्ष महाराष्ट्र टाइम्स के पुणे आवृत्ति के संपादक श्रीधर लोणी को आद्य पत्रकार देवर्षि नारद माध्यम पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया. साथ ही सकाल के विशेष संवाददाता मयूरेश प्रभुणे और प्रभात की वरिष्ठ संवाददाता अंजलि खमितकर, मोनेश शेलार को ओशासक पत्रकारिता पुरस्कार से सम्मानित किया गया. वेिश संवाद केंद्र के पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत अध्यक्ष अभय कुलकर्णी, डीईएस के उपाध्यक्ष एड. अशोक पलांडे, डीईएस नियामक मंडल के कार्यवाह डॉ.आनंद काटिकर मंच पर उपस्थित थे. वरिष्ठ पत्रकार श्रीधर लोणी ने कहा कि, मूलभूत सुविधा, शिक्षा, आरोग्य, ट्रैफिक, अच्छी सडकें, बिजली और पानी इसी के संबंध में ही घटनाएं समाज में घटती रहती हैं. सामान्य लोगों के प्रश्नों को उजागर करने की भूमिका पत्रकार की होती है. लोगों की समस्याओं का निराकरण करने के लिए पत्रकारों को कार्य करना आवश्यक है. पत्रकारों ने हमेशा सामान्य नागरिकों के हित का ही विचार करना जरूरी है. क्योंकि मीडिया द्वारा उठाए गए सवालों से समाज में बदलाव आने से और लोगों के जीवन में सुधार आने से ही पत्रकारिता सफल होगी. आज के जमाने में पत्रकारिता को अलग नजरिए से देखा जाता है. क्योंकि आज का जमाना अलग है. पत्रकारिता निःपक्षता का माध्यम है. निःपक्षता की व्याख्या भी अब बदल गई है. लेकिन सामान्य लोगों के प्रति पत्रकारों को पक्षपाती जरूर होना चाहिए. तभी समाज के प्रश्न सुलझा सकेंगे. आज मुझे देवर्षि नारद माध्यम पुरस्कार के काबिल समझा, इसलिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं. पुरस्कार मिलना यानि अपने कार्य की प्रशंसा होती है, तो आनंद होता है. इस कार्यक्रम का प्रास्ताविक अभय कुलकर्णी ने किया. एड.अशोक पलांडे ने पुरस्कार प्राप्त पत्रकारों को बधाई दी. कार्यक्रम का सूत्रसंचालन वसुंधरा काशीकर ने किया. आभार प्रदर्शन डॉ. आनंद काटिकर ने किया.