सम्यक्त्‌‍व का प्रकाश मन को स्वस्थ और संतुलित रखता है : श्री अभिषेक मुनि

    24-Aug-2026
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कोथरुड, 23 अगस्त (आ. प्र.)

श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरु सुमति शिष्य, उपप्रवर्तक, तप दिवाकर गुरुदेव श्री अभिषेक मुनि जी म सा ने रविवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए सम्यक्त्‌‍व के महत्व पर प्रकाश डाला. गुरुदेव ने फरमाया कि जब तक आत्मा में सम्यक्त्‌‍व का प्रकाश नहीं होता, तब तक जीवात्मा की गति मोक्षमार्ग की ओर नहीं हो सकती. जब जीवात्मा में सम्यक्त्‌‍व का प्रकाश प्रकट हो जाता है, तब परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हो जाएं, व्यक्ति का मन स्वस्थ और संतुलित रहता है. परिस्थितियां बदलती रहती हैं और कभी अनुकूल तो कभी प्रतिकूल हो सकती हैं, लेकिन प्रतिकूल परिस्थितियों में भी यदि हमारा मन अनुकूल बना रहे तो समझना चाहिए कि हमारे अंतर में सम्यक्त्‌‍व का प्रकाश प्रकट हो चुका है. सम्यक्त्‌‍व के लक्षणों की चर्चा करते हुए गुरुदेव ने बताया कि इसका पहला लक्षण शम है. शम अर्थात शत्रु के प्रति भी क्षमा का भाव उत्पन्न होना, कषायों का उपशमन होना तथा वैरभाव का समाप्त हो जाना. उन्होंने कहा कि कष्ट के समय भी दुख की अनुभूति से ऊपर उठकर समभाव में रहना ही वास्तविक आध्यात्मिक उपलब्धि है. कर्म विपाक के विषय में गुरुदेव ने कहा कि सुख और दुख हमें हमारे कर्मों के अनुसार प्राप्त होते हैं. सुख-दुख का अनुभव कराने का कार्य वेदनीय कर्म का है, किंतु उन परिस्थितियों में सुखी या दुखी होना स्वयं हमारे ऊपर निर्भर करता है. बाहरी दुनिया में किसी के पास इतनी शक्ति नहीं कि वह हमें भीतर से सुखी या दुखी कर सके. कर्मों की प्रकृति को समझाते हुए गुरुदेव ने कहा कि अधिकांशतः हम कर्मों के अनुसार ही चलते हैं. कर्म हंसाता है तो हम हंसने लगते हैं और कर्म रुलाता है तो हम रोने लगते हैं.