नई दिल्ली, 24 अगस्त (आ. प्र.)
केंद्र ने अंततः भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) के 11 हवाई अड्डाें काे पांच संयुक्त रियायताें के माध्यम से पट्टे पर देने का निर्णय लिया है.
तदनुसार, सार्वजनिक निजी भागीदारी मूल्यांकन समिति (पीपीपीएसी) ने हवाई अड्डाें काे पट्टे पर देने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. यह घटनाक्रम केंद्र सरकार की इन हवाई अड्डाें के संचालन, प्रबंधन और विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी लाने की याेजना में एक महत्वपूर्ण कदम है. दस्तावेज के अनुसार, पांच प्रस्तावित हवाई अड्डा बंडलाें में अमृतसरकांगड़ा, वाराणसी-गया-कुशीनगर, भुवनेश्वर-हुबली, रायपुर-औरंगाबाद और तिरुचिरापल्ली-तिरुपति शामिल हैं.
4 अगस्त काे आयाेजित पीपीपीएसी की 149वीं बैठक में इन प्रस्तावाें पर विचार किया गया, जिसमें समिति ने पांचाें बंडलाें के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी.
इसके अलावा, यह घटनाक्रम तब सामने आया है, जब केंद्र सरकार बड़े हवाई अड्डाें से क्राॅस-सब्सिडी के माध्यम से छाेटी सुविधाओं की दीर्घकालिक स्थिरता में सुधार करने के लिए बड़े और छाेटे हवाई अड्डाें के संयाेजन की जांच कर रही थी.
दस्तावेजाें के अनुसार, प्रस्तावित रियायताें में हवाई अड्डाें के संचालन, प्रबंधन और विकास काे शामिल किया जाएगा और इनकी रियायत अवधि 50 वर्ष हाेगी.
गाैरतलब है कि प्रस्तावित लेनदेन के लिए एएआई प्रायाेजक और कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेगा. सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद नागरिक उड्डयन मंत्रालय प्रस्तावित लेनदेन संरचना में निवेशकाें की रुचि का आकलन करने के लिए अवसंरचना क्षेत्र के खिलाड़ियाें के साथ बाजार सर्वेक्षण करेगा. दस्तावेजाें के अनुसार, चूंकि बंडलिंग माॅडल काे पहली बार आजमाया जा रहा है, इसलिए प्रस्ताव में आवश्यकता पड़ने पर संशाेधन करने और अंतिम सिफारिश के लिए पीपीपीएसी काे प्रस्तुत करने से पहले संभावित निजी क्षेत्र के प्रतिभागियाें से प्राप्त प्रतिक्रिया पर विचार किया जाएगा.
प्रस्तावित माॅडल का उद्देश्य हवाई अड्डाें के विकास और संचालन में निजी क्षेत्र की भागीदारी काे बढ़ावा देना है, साथ ही छाेटे हवाई अड्डाें काे बड़े हवाई अड्डाें के साथ मिलाकर उनकी व्यवहारिकता में सुधार करना है. इसके अलावा, केंद्र सरकार कई महीनाें से इस प्रस्ताव पर काम कर रही है.