केवल 8% ग्रेजुएट को ही योग्यतानुसार मिल रही नौकरी

बीए, बीकॉम या बीएससी जैसी डिग्रियां अब नौकरी की गारंटी नहीं

    27-Aug-2026
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rojgar 
नई दिल्ली, 26 अगस्त (वि.प्र.)
देश में हर साल बड़ी संख्या में युवा ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करके नाैकरी की तलाश में निकलते हैं, लेकिन अब उनकी डिग्री और नाैकरी के बीच बड़ा अंतर सामने आया है. देश में केवल 8 प्रतिशत ग्रेजुएट काे ही याेग्यतानुसार नाैकरी मिल रही है.
 
बीए, बीकाॅम, या बीएससी जैसी डिग्रियाें से अब नाैकरी की गारंटी नहीं रहीं. नीति आयाेग ने अपनी रिपाेर्ट मेें चिंता जताते हुए टे्निनकल-राेजगार पर फाेकस करने का सुझाव दिया है. करीब 90 प्रतिशत ग्रेजुएट ऐसे काम कर रहे जाे उनकी याेग्यता के हिसाब से है ही नहीं.
 
पुराने पाठ्यक्रम भी बेराेजगारी के लिए जिम्मेदार माना जा रहा. देश में शिक्षित बेराेजगाराें की दर बेहद चिंताजनक है.
दरअसल नीति आयाेग की और से जारी ठशळारसळपळपस डज्ञळश्रश्रळपस ऋेी तळज्ञीळीं इहरीरीं 2047 रिपाेर्ट में बताया गया है कि देश में सिर्फ 8.25 प्रतिशत साड़ी ग्रेजुएट्स ही अपनी याेग्यता के अनुरूप नाैकरी कर रहे हैं.
 
रिपाेर्ट के अनुसार समस्या सिर्फ बेराेजगारी तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्किल और राेजगार के बीच तालमेल की कमी भी बड़ी समस्या बनकर सामने आई है.
 
नीति आयाेग ने देश की हायर और तकनीकी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षा और राेजगार बाजार के बीच एक बुनियादी अंतर की ओर इशारा किया है. रिपाेर्ट के अनुसार कई संस्थानाें में पढ़ाया जाने वाला पाठ्यक्रम बदलती इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार अपडेट नहीं है. ऐसे में डिग्री डिप्लाेमा और सर्टिफिकेट हासिल करने के बावजूद युवाओं के लिए नाैकरी हासिल करना आसान नहीं हाेता है. देश में बड़ी संख्या में छात्र सामान्य ग्रेजुएशन काेर्स में एडमिशन लेते हैं. करीब 3.4 कराेड़ छात्र अंडर ग्रेजुएट प्राेग्राम में पढ़ रहे हैं, जिनमें लगभग 1.3 कराेड़ छात्र बीए कर रहे हैं.