शरीर के संतुलन के लिए आलथी-पालथी

    28-Aug-2026
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health
आलथी-पालथी लगाकर सही ढंग से बैठना बहुत जरूरी हाेता है. यह शरीर में संतुलन और लचीलापन बनाए रखता है. यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि यदि आप गलत तरीके से बैठते हैं, ताे इससे कमर, घुटनाें, पिंड़लियाें और टखनाें में दर्द हाे सकता है.
 
शरीर का यह असंतुलित भार कई शारीरिक समस्याओं का कारण बनता है. यह ठीक उसी प्रकार है जैसे काेई गाड़ी एक ओर झुक जाए. ठीक वैसे ही जब हमारा शरीर झुकता है, ताे हमें असुविधा का अनुभव हाेता है. इसके लिए सबसे पहले शरीर का निरीक्षण करें. अब आप आलथीपालथी लगाकर बैठे और आंखें बद करें. महसूस करें कि आप के शरीर का भार कहां पड़ रहा है. ्नया यह भार दाहिने कूल्हे पर पड़ रहा है, या बाएं कूल्हे पर? यदि भार किसी एक ओर अधिक महसूस हाे रहा है, ताे आपके बैठने की मुद्रा सही नहीं है.
 
गलत मुद्रा में बैठने से पेट आगे की ओर निकल जाता है. छाती दब जाती है और कमर झुक जाती है. जब हम सही मुद्रा में बैठते हैं ताे पेट अंदर खिंचा हुआ हाेता है. कमर सीधी रहती है और छाती स्वाभाविक रूप से उभरी हुई हाेती है.
 
अभ्यास के लिए दाहिने कूल्हे काे हथेली से सहारा देकर थाेड़ा दाहिनी ओर खींचें. बाएं कूल्हे काे हथेली से सहारा देकर थाेड़ा बाईं ओर खींचें और देखें. शरीर का भार अब दाेनाें कूल्हे पर समान रूप से वितरित है या नहीं.
सांस खींचकर पेट काे थाेड़ा खींचें और छाती काे ऊपर उठाएं. इससे शरीर संतुलित और स्थिर हाे जाएगा.