नई दिल्ली, 28 अगस्त (विशेष प्रतिनिधि)
पेट्राेल में मिलावट करने वाले करीब 2573 पंपाें पर बिक्री राेक लगा दी है.
पेट्राेल में पानी और ्नलाेराइड मिलाने की शिकायत के बाद पेट्राेलियम मंत्रालय का ए्नशन में आते हुए बड़ी कार्रवाई की.
बता दें कि गाड़ियां बनाने वाली कंपनियाें की शिकायत तथा ई-20 पेट्राेल में मिश्रण की शिकायत के बाद विशेष अभियान के तहत कार्रवाई हुई. पेट्राेलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने भारत के खुदरा ईंधन नेटवर्क में एक व्यापक गुणवत्ता नियंत्रण अभियान शुरू किया है और मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्राें के अनुसार, 25 अगस्त, 2026 तक 2,573 गैर-अनुपालन करने वाले आउटलेट्स पर पेट्राेल की बिक्री राेक दी गई है.
इंडियन ऑयल काॅर्पाेरेशन 1,257 पंपाें के साथ सबसे आगे है, इसके बाद हिंदुस्तान पेट्राेलियम 915 और भारत पेट्राेलियम 401 पंपाें के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं.
इसकी शुरुआत 28 जुलाई काे साेसाइटी ऑफ इंडियन ऑटाेमाेबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) द्वारा मंत्रालय काे लिखे गए एक पत्र से हुई, जाे जल्द ही लीक हाे गया.
इस पत्र में देशभर में जांचे गए ई20 ईंधन के नमूनाें में क्लाेराइड संदूषण के खतरनाक रूप से उच्च स्तर की चिंता जताई गई थी.
एसआईएएम ने कुछ ही दिनाें में यह कहते हुए पत्र वापस ले लिया कि आंकड़ाें काे और सत्यापन की आवश्यकता है, लेकिन नुकसान हाे चुका था. राॅयटर्स द्वारा कार निर्माताओं के आंतरिक परीक्षण आंकड़ाें की बाद में की गई जांच ने संदूषण के मुद्दे काे सार्वजनिक चर्चा में बनाए रखा और सरकार काे प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर कर दिया.
उपभाेक्ताओं का विश्वास बहाल करने और आपूर्ति श्रृंखला में दूषित पदार्थाें और पानी की समस्या से निपटने के लिए, सरकार ने भूमिगत टैंकाें की दिन में 8 से 12 बार जल रिसाव जांच अनिवार्य कर दी है.