पिंपरी, 28 अगस्त (आ.प्र.)
मनपा द्वारा वर्ष 2018 में पाैने सात कराेड़ रुपये खर्च करने के आठ साल बाद भी शहर में वृक्ष गणना का अधूरा काम अभी तक पूरा नहीं हाे सका है. इसके बावजूद, अब उद्यान विभाग ने एक बार फिर से वृक्ष गणना कराने का प्रयास शुरू कर दिया है.
इसके लिए विभाग ने टेंडर निकाला है. इससे यह आशंका जताई जा रही है कि पुरानी एजेंसी से काम कराने में असफल रहने के बाद, अब विभाग फिर से वृक्ष गणना के नाम पर कराेड़ाें रुपये पानी की तरह बहाने जा रहा है.
वृक्षाराेपण हेतु मानक तय किया महाराष्ट्र नागरिक क्षेत्र वृक्ष संरक्षण अधिनियम के अनुसार, सड़काें के किनारे कितने पेड़ हाेने चाहिए, इसका एक मानक तय किया गया है. 24 मीटर और उससे अधिक चाैड़ाई वाली सड़काें पर प्रत्येक दस मीटर की दूरी पर एक पेड़ हाेना अनिवार्य है. यदि सड़कें 12 से 24 मीटर चाैड़ी हैं, ताे सड़क के दाेनाें ओर दस-दस मीटर की दूरी पर एक पेड़, और 6 मीटर से 12 मीटर चाैड़ी सड़काें पर प्रत्येक 20 मीटर की दूरी पर एक पेड़ हाेना चाहिए.
तत्कालीन आयुक्त श्रावण हर्डीकर ने वर्ष 2018 में भाैगाेलिक सूचना प्रणाली के माध्यम से वृक्ष गणना करने का आदेश दिया था. तदनुसार, टेंडर प्रक्रिया चलाकर मुंबई की मेसर्स टेरेकाॅन इकाेटेक नामक एजेंसी काे काम साैंपा गया था. यह काम 6 कराेड़ 76 लाख 45 हजार 238 रुपये का था. संबंधित एजेंसी काे वृक्ष गणना के लिए दाे साल और रखरखाव के लिए पांच साल का समय दिया गया था.
एजेंसी ने वृक्ष गणना का काम करते हुए शहर में 32 लाख 16 हजार 799 पेड़ पाए जाने का दावा किया था. हालांकि, पेड़ाें की छंटाई और कटाई के संबंध में नागरिकाें काे ऑनलाइन अनुमति देने के लिए एक एप विकसित करने का काम भी संबंधित एजेंसी काे साैंपा गया था.
लेकिन, काम की समयावधि समाप्त हाेने के बाद भी एजेंसी ने ऐप विकसित नहीं किया.
इस कारण मनपा के उद्यान विभाग ने मेसर्स टेरेकाॅन इकाेटेक एजेंसी का 1 कराेड़ 69 लाख 11 हजार 486 रुपये का भुगतान राेक दिया. एजेंसी काे बार- बार कारण बताओ नाेटिस जारी करने के बावजूद आगे काेई कार्रवाई नहीं हुई.