स्वारगेट, 28 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) देश के जिस हिस्से में समस्याएं और दुख हैं, वहां सबसे पहले पहुंचकर ‘महाराष्ट्र आपके साथ है’ का संदेश देते हुए समाजसेवा का यज्ञ निरंतर जारी रखने वाले संजय नहार के कार्य को मैं सलाम करता हूं, ऐसे गौरवोद्गार पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुशीलकुमार शिंदे ने व्यक्त किए. प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता एवं सरहद संस्था के संस्थापक संजय नहार के 61वें जन्मवर्ष के अवसर पर ङ्गसरहदचा सांगातीफ गौरवग्रंथ का प्रकाशन और सरहद संस्था की तीन दशक की यात्रा पूर्ण होने का समारोह स्वारगेट स्थित गणेश कला क्रीड़ा मंच में आयोजित किया गया. शिंदे समारोह की अध्यक्षता कर रहे थे. केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ऑनलाइन उपस्थित थे. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटील, नगर विकास एवं परिवहन राज्यमंत्री माधुरी मिसाल, ललित गांधी, डॉ. सदानंद मोरे, राजेश पांडे, गिरीश गांधी, रणजीतसिंह मोहिते पाटिल, राजीव खांडेकर, प्रमोद बोडो, मोहंमद हनीफा जान, मुश्ताक छाया, फैयाज कल्लू, सुषमा नहार, डॉ. शैलेश पगारिया, शैलेश वाडेकर, संतसिंह मोखा, युवराज शाह, इंदर छाजेड सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे. शिंदे ने पंजाब के अशांत दौर में नहार द्वारा किए गए कार्यों की सराहना की. कश्मीर में भी उन्होंने अनाथ बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी स्वीकार कर उनके लिए पुणे में निवास और शिक्षा की व्यवस्था की. विपरीत परिस्थितियों, धमकियों और हमलों से न डरते हुए उन्होंने समाजसेवा का व्रत जारी रखा, ऐसा शिंदे ने कहा. नितिन गड़करी ने राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए नहार के लोकजागरण कार्य की सराहना की. पंजाब में उन्होंने 21 शांति यात्राएं निकालकर मानवता का रिश्ता मजबूत किया, ऐसा गड़करी ने कहा. चंद्रकांत पाटिल ने विद्यार्थियों में देशप्रेम की भावना विकसित करने में नहार के योगदान का उल्लेख किया. माधुरी मिसाल ने उन्हें निरंतर संघर्ष करने वाला सेवाभावी सहयोगी बताया. राजेश पांडे ने उन्हें तन-मन से देश को समर्पित मित्र जबकि डॉ. सदानंद मोरे ने ‘महाराष्ट्र धर्म के वर्तमान समय के प्रहरी’ फ के रूप में संबोधित किया. लद्दाख और कश्मीर के सांसदों ने पर्यटन, रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में नहार के योगदान की सराहना की. रणजीतसिंह मोहिते पाटिल, राजीव खांडेकर और गिरीश गांधी ने भी अपने विचार व्यक्त किए. डॉ. शैलेश पगारिया ने प्रस्तावना रखी, नीरजा आपटे और वैभव वाघ ने संचालन किया, जबकि लेशपाल जवलगे ने आभार माना. संजय नहार ने सम्मान का श्रेय सहयोगियों, मित्रों और परिवार को देते हुए कहा कि व्यक्ति से बड़ा कार्य होना चाहिए और वह लंबे समय तक जीवित रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस यात्रा में अनेक लोग जुड़े और अब जिम्मेदारी संभालने वाली नई पीढ़ी तैयार हो गई है, इसका संतोष है.