पाषाण, 2 अगस्त
(आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) रक्षा उत्पाद में भारत आगे बढ रहा है, इस समय हमारा निर्यात बहुत बढ़ रहा है.
पिछले साल लगभग 1,76,000 कराेड़ का रक्षा उत्पादन हुआ है, जिसमें से लगभग 25 प्रतिशत प्राइवेट सेक्टर से आया है. यह जानकारी रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार ने दी.
पाषाण स्थित डाॅ.ए.पी.जे. अबुल कलाम ऑडिटाेरियम में शुक्रवार (31 जुलाई) काे, रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पादन विभाग के अंतर्गत, द कंट्राेलरेट ऑफ ्नवालिटी एश्यारेंस (गुणवत्ता आश्वासन) (सैन्य विस्फाेटक) ने सैन्य विस्फाेटक एवं प्रणाेदक: सुरक्षा एवं अनुपालन ( मिलिटरी ए्नसप्लाेजिव एंड प्राेपेलेंटस् ः सेफ्टी एन्ड कंप्लायन्स) पर एक राष्ट्रीय संगाेष्ठी का आयाेजन किया गया. इस अवसर पर मंच पर रक्षा उत्पादन विभाग की सह सचिव डाॅ.गरिमा भगत, रक्षा उत्पादन गुणवत्ता आश्वासन के महानिदेशक एन. मनाेहरन, कंट्राेलरेट ऑफ क्वालिटी एश्याेरेंस (मिलिट्री एक्सप्लाेजिव) के कंट्राेलर डाॅ. टी. के.
वरदराजन उपस्थित थे. इस संगाेष्ठी में प्रतिष्ठित नीति निर्माता, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, रक्षा उत्पादन के नेता, वैज्ञानिक, उद्याेग विशेषज्ञ और शिक्षाविद शामिल हुए थे.
संगाेष्ठी का मकसद नेशनल सेफ्टी इकाेसिस्टम काे मजबूत करना और इंडियन आर्म्ड फाेर्सेज के लिए सुरक्षित, भराेसेमंद और अच्छी क्वालिटी के हथियार और गाेला-बारूद की उपलब्धता में मदद करना था, साथ ही घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री में इनाेवेशन, टेक्नाेलाॅजी में तरक्की और ज़िम्मेदारी से ग्राेथ काे मुमकिन बनाना था.
पत्रकाराें से बातचीत करते हुए संजीव कुमार ने जानकारी दी कि, आधुनिक तकनीक का उपयाेग करके सुरक्षा काे और मजबूत करने के लिए, आवश्यक कदम उठाएं जाएंगे. दुनिया भर में युद्ध या युद्ध जैसी स्थितियां हैं, जाे बहुत तेज़ गति से विस्फाेटकाें और उच्च ऊर्जा सामग्री/ प्राेपेलेंट की खपत कर रही हैं. विभिन्न देशाें के स्टाॅक खाली हाे रहे हैं. लगभग पूरे यूराेप ने, जिसने पिछले 40-50 वर्षाें में काेई युद्ध नहीं देखा है, अपने उस औद्याेगिक बुनियादी ढांचे काे हटा दिया है, जाे इस प्रकार की सामग्री का उत्पादन करता था. विभिन्न कारणाें से उस प्रकार के बुनियादी ढांचे काे फिर से खड़ा करना बहुत कठिन है. इनमें से कुछ कारण यूराेप के लिए विशिष्ट हैं, जाे शायद हम पर लागू नहीं हाेते.
उन्हाेंने कहा कि, सुरक्षा की सबसे अधिक आवश्यकता रक्षा और विस्फाेटक उद्याेग में हाेती है, जहां हम उच्च विस्फाेटक सामग्री, प्राेपेलेंट (नाेदक) आदि के साथ काम करते हैं.
वर्तमान में और आने वाले दशक में हमारे पास विभिन्न प्रकार के विस्फाेटकाें और प्राेपेलेंट के निर्माण की क्षमता बढ़ाने के लिए न केवल इस देश में, बल्कि दुनिया भर में अपार अवसर माैजूद हैं.
हमारे पास प्राेपेलेंट की कमी है, इसलिए जाे भी प्राेपेलेंट का निर्माण कर रहा है, हम केवल उसी के पीछे पड़े हैं कि वह प्राेपेलेंट दे ताकि मूल्यवर्धित उत्पाद या आवश्यक गाेला-बारूद तैयार किया जा सके; लेकिन अपने देश के भीतर प्राेपेलेंट क्षमता के निर्माण में पर्याप्त निवेश नहीं किया जा रहा है. इसके लिए निश्चित रूप से समय, संसाधन और धन के निवेश की आवश्यकता हाेगी,यह जानकारी संजीव कुमार ने दी.
उन्हाेंने सभी उद्याेगाें से आग्रह किया कि वे बुनियादी सामग्रियाें के निर्माण में अपना धन, समय और संसाधन निवेश करना शुरू करें. यह उन्नत और मूल्यवर्धित गाेला-बारूद बनाने में मदद करेगा, जिसकी न केवल हमारे सशस्त्र बलाें काे आवश्यकता हाेगी, बल्कि दुनिया भर में इसकी मांग है. हम ऐसी सुविधाओं के निर्माण काे सबसे तेज़ गति से सुगम बनाने के लिए प्रयास कर रहे हैं.