नई दिल्ली, 30 अगस्त (वि.प्र.)
भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि भारतीय न्यायपालिका ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए तरह के फ्राॅड पर संसद के कानून बनाने का इंतजार करने के बजाय सक्रिय रूप से कार्रवाई करती है. उन्हाेंने शनिवार काे लंदन में 43वें इंटरनेशनल सिम्पाेजियम ऑन इकाेनाॅमिक क्राइम के समापन समाराेह में यह बात कही. सीजेआई ने बताया कि सुप्रीम काेर्ट ने हाल ही में ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम पर स्वतः संज्ञान लिया है.
इसमें ठग वीडियाे काॅल के जरिए खुद काे पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी या सरकारी अधिकारी बताकर लाेगाें से धाेखाधड़ी करते हैं. सुप्रीम काेर्ट ने दिसंबर 2025 में डिजिटल अरेस्ट के एक मामले में स्वत: संज्ञान लिया था. काेर्ट ने केंद्र और राज्याें से इस समस्या के स्तर का आकलन करने, अलग अपराध बनाने और नुकसान के अनुपात में सजा तय करने की दिशा में कदम उठाने काे कहा था. सूर्यकांत ने कहा कि पीएमएल जैसी व्यवस्थाएं पूरी तरह अचूक नहीं हैं. कुछ लाेगाें ने जांच एजेंसियाें पर इसके दुरुपयाेग के आराेप लगाए हैं. इनमें गिरफ्तारी के स्पष्ट कारण नहीं बताने और जरूरत से ज्यादा हिरासत में रखने जैसी शिकायतें शामिल हैं. ऐसे मामलाें में न्यायपालिका ने हस्तक्षेप कर राहत दी है. गिरफ्तार किए गए व्यक्ति काे गिरफ्तारी के कारण लिखित रूप में देना जरूरी है. केवल माैखिक रूप से कारण बताना पर्याप्त नहीं है. उन्हाेंने अरविंद केजरीवाल बनाम सीबीआई मामले का भी जिक्र किया और कहा कि लंबे समय तक मुकदमे से पहले हिरासत में रखना सजा में नहीं बदलना चाहिए. सूर्यकांत ने कहा कि दुनिया में हर साल बड़े पैमाने पर अवैध धन की मनी लाॅन्ड्रिंग हाेती है. इसके मुकाबले 100 में से एक से भी कम हिस्सा वापस हासिल हाे पाता है.