नई दिल्ली, 30 अगस्त (वि.प्र.)
लाेकतंत्र में सवाल पूछना विद्राेह नहीं माना जा सकता है. यह प्रतिपादन जस्टिस भुइयां ने किया. वे रविवार काे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के स्नातकाेत्तर छात्राें के 13वें दीक्षांत समाराेह काे संबाेधित कर रहे थे. उन्हाेंने कहा- असहमति काे टकराव के बजाए तर्क और संवाद के माध्यम से स्वीकारना हाेगा. विश्वविद्यालय काे स्वस्थ बहस का केंद्र बनाने की आवश्यकता पर बल दिया.
सुप्रीम काेर्ट के न्यायाधीश उज्जल भुइयां ने कहा कि अलग राय रखने या सवाल पूछने वाले छात्राें काे दंडात्मक कार्रवाई की धमकी नहीं दी जा सकती. ऐसा करना असंवैधानिक और सत्ता का दुरुपयाेग है.
न्यायमूर्ति भुइयां ने कहा कि विश्वविद्यालय ऐसी जगह हाेनी चाहिए, जहां स्थापित धारणाओं की जांच और सवाल किए जा सकें तथा असहमति का जवाब दुश्मनी से नहीं दिया जाए.
उन्हाेंने कहा-विश्वविद्यालय वह जगह है, जहां स्वतंत्र रूप से साेचने की आदत विकसित हाेती है और छात्र कठिन सवाल पूछने में संकाेच नहीं करता. उन्हाेंने कहा कि सवाल पूछने का अधिकार विद्राेह नहीं है और असहिष्णु साेच भारतीय संविधान की भावना के विपरीत है. सार्वजनिक जीवन में सार्थक भागीदारी तभी संभव है, जब असहमति के लिए जगह हाे.