चंदा लेने से पहले धर्मादाय आयुक्त की अनुमति जरूरी

पब्लिक ट्रस्ट प्रैक्टिसनर्स एसोसिएशन, पुणे के पूर्व अध्यक्ष एड. शिवराज कदम जहागीरदार ने दी जानकारी

    31-Aug-2026
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शिवाजीनगर, 30 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए त्यौहार या सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने हेतु लोगों से पैसे इकट्ठे किए जाते हैं, जिसे चंदा कहा जाता है. कानून के अनुसार, इस तरह का चंदा जुटाने के लिए धर्मादाय कार्यालय की अनुमति लेना आवश्यक है. आगामी त्यौहारों में, दही हांडी, गणेशोत्सव, नवरात्रि और दीपावली पहाट जैसे कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए आयोजकों के लिए यह सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. पब्लिक ट्रस्ट प्रैक्टिसनर्स एसोसिएशन (पुणे) के पूर्व अध्यक्ष एड. शिवराज कदम जहागीरदार ने बताया कि पिछले साल से महाराष्ट्र सार्वजनिक ट्रस्ट अधिनियमम में संशोधन हुआ है. इस कानून की धारा 66-सी के अनुसार, ऐसा करने वाले व्यक्तियों को तीन महीने की साधारण जेल की सजा दी जा सकती है. इसके अलावा, बिना अनुमति इकट्ठा की गई राशि का डेढ़ गुना जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है. अन्य आवश्यक अनुमतियां प्राप्त करते समय चैरिटी कार्यालय (धर्मादाय कार्यालय) की अनुमति लेना पहली प्राथमिकता होगी. वर्तमान समय में त्यौहारों का मौसम शुरू हो रहा है. इसके तहत अगले दो- तीन महीनों में कई सार्वजनिक उत्सव आयोजित किए जाएंगे. इन त्यौहारों के अवसर पर बड़े पैमाने पर चंदा, दान और प्रायोजकों से मदद के रूप में धनराशि जुटाई जाती है. जो समितियां धर्मादाय आयुक्त के पास स्थायी रूप से पंजीकृत हैं, उन्हें धन जुटाने के लिए किसी अलग अनुमति की आवश्यकता नहीं है. फिर भी, ऐसी समितियों के लिए यह जरूरी है कि वे अपने संगठन के आवश्यक दस्तावेज जमा करके अपनी जानकारी अपडेट रखें. साथ ही, उन्हें सभी वित्तीय वर्षों का लेखा-जोखा (ऑडिट रिपोर्ट) ऑनलाइन जमा करना अनिवार्य है. चंदे के रुप में पैसे स्वीकार करने के बाद उस राशि की रसीद देना अनिवार्य है. ऐसा कार्यक्रम समाप्त होने के बाद, कुल जमा (आय) और खर्च हुई राशि की रिपोर्ट, लेखा परीक्षक (ऑडिटर) की टिप्पणी के साथ, स्थानीय धर्मार्थ (चैरिटी) कार्यालय में निर्दिष्ट समय सीमा के भीतर जमा करना आवश्यक है. शेष बची हुई राशि को धर्मार्थ कार्यालय के प्रशासनिक कोष (पीटीए फंड) में जमा करना अनिवार्य है.  
 
दंडात्मक प्रावधानों का ध्यान रखना बहुत आवश्यक

सार्वजनिक रूप से उत्सव मनाते समय मंडलों / समितियों को चंदा एकत्र करने से जुड़े बदले हुए दंडात्मक प्रावधानों का ध्यान रखना आवश्यक है. यदि चंदे की हेराफेरी या गबन के संबंध में कोई शिकायत दर्ज होती है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं. - एड. शिवराज कदम जहागीरदार पूर्व अध्यक्ष, पब्लिक ट्रस्ट प्रैक्टिसनर्स एसोसिएशन, पुणे