सांगवी, 30 अगस्त (आ.प्र.)
राज्यभर में अस्पतालाें में आग की विभिन्न घटनाओं के कारण नवजात शिशुओं सहित गंभीर रूप से बीमार मरीजाें की जान जाने की घटनाओं की पृष्ठभूमि में, पुणे जिला अस्पताल में अग्निसुरक्षा का सवाल खड़ा हाे गया है. अस्पताल में पिछले डेढ़ साल में तीन बार आग लगने की घटनाएं हुई हैं. हालांकि साैभाग्य से इन घटनाओं में काेई जनहानि नहीं हुई.
इसी पृष्ठभूमि में जब जानकारी जुटाई गई, ताे यह बात सामने आई कि जिला अस्पताल का वर्ष 2021 के बाद से फायर सेफ्टी ऑडिट ही नहीं हुआ है.
17 नवंबर 2024 काे नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) के पास स्टाेररूम में आग लग गई थी. तत्परता दिखाते हुए नवजात शिशुओं काे सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया. उसके बाद 16 अप्रैल 2026 काे उसी परिसर में दीवार पर लगा पंखा गर्म हाेकर शाॅर्ट सर्किट हाेने से आग लग गई. उस समय एसएनसीयू में 15 नवजात शिशुओं का इलाज चल रहा था.
कर्मचारियाें की सतर्कता से बड़ी दुर्घटना टल गई.
इसके बाद 18 जून 2026 काे पुरानी गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) के बैकअप यूनिट में शाॅर्ट सर्किट हाेने की घटना हुई. इन घटनाओं के कारण क्या अस्पताल में बिजली का काम गुणवत्तापूर्ण हुआ है, क्या विद्युत प्रणाली की नियमित जांच हाेती है और क्या अग्निसुरक्षा ऑडिट की कमियाें काे दूर किया गया हैऐसे सवाल उठ रहे हैं. इस बीच, पिंपरीचिंचवड़ शहर की सीमा में स्थित पुणे जिला अस्पताल का फायर सेफ्टी ऑडिट-2021 के बाद न हाेने की बात सामने आई है. दूसरी ओर, मनपा अस्पतालाें के फायर सेफ्टी ऑडिट अद्यतन (अपडेट) हाेने की जानकारी मनपा फायर ब्रिगेड विभाग ने दी है.
शहर में 600 से अधिक निजी अस्पताल हैं.
हालांकि, उनमें से वास्तव में कितने अस्पतालाें का फायर सेफ्टी ऑडिट हुआ है, इसकी एकीकृत जानकारी विभाग के पास न हाेने की बात कही जा रही है. कई निजी अस्पताल लाइसेंस के लिए निजी संस्थाओं से ऑडिट करवा लेते हैं, ऐसा भी विभाग का कहना है.
अग्निसुरक्षा ऑडिट समय पर न हाेने पर अस्पताल की विद्युत प्रणाली, ऑक्सीजन लाइन और अग्निराेधक सुविधाओं में कमियां उपेक्षित रह सकती हैं. इससे आग लगने पर नवजात शिशुओं, आईसीयू के मरीजाें और कर्मचारियाें की जान काे गंभीर ख़तरा पैदा हाेने की संभावना रहती है. साथ ही चिकित्सा उपकरण, महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और कराेड़ाें रुपये की प्राॅपर्टी आग में नष्ट हाे सकती है.