समय और आत्मा का परस्पर गहरा संबंध होता है : श्री अभिषेक मुनि

    31-Aug-2026
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fdg
 
कोथरुड़, 30 अगस्त (आ. प्र.)

 श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी ने कहा कि, परमात्मा ने संदेश दिया है कि, समय मात्र का भी प्रमाद मत करो. समय ही जीवन है और जीवन ही समय है. जो व्यक्ति समय के महत्व को समझ लेता है, वह अपने जीवन की सार्थकता को समझ लेता है. समय और आत्मा का परस्पर गहरा संबंध है. हमारा अस्तित्व तभी तक है, जब तक हमारे पास समय है, इसलिए जीवन को साधने का अर्थ है-जीवन के प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना और उसे व्यर्थ जाने से बचाना. व्यक्ति जितना प्रमाद से दूर रहकर ज्ञान, ध्यान, धर्म और आत्मचिंतन में समय लगाता है, उतना ही उसका जीवन सार्थक बनता है. जो दिन और रात बीत जाते हैं, वे कभी लौटकर नहीं आते, इसलिए समय को साधना अत्यंत आवश्यक है. समय को साधने से जीवन सध जाता है. हमें जीवन जीने के लिए अनेक साधन, सुविधाएं और अवसर प्राप्त हुए हैं. इन साधनों का हम किस प्रकार उपयोग कर रहे हैं, यही हमारे जीवन की सार्थकता का वास्तविक मापदंड है. जब हम सांसारिक कार्यों अथवा मनोरंजन के लिए कहीं जाते हैं तो अपने साथ अनेक लोगों को जोड़कर ले जाते हैं, लेकिन जब धर्मसभा, प्रवचन या गुरु-दर्शन का अवसर आता है, तब हमें विचार करना चाहिए कि हम कितने लोगों को धर्म से जोड़ने और प्रेरित करने का प्रयास करते हैं. हमें साधन भी मिले हैं और समय भी मिला है. इनका सदुपयोग करना है या दुरुपयोग, यह हमारे स्वयं के हाथ में है.