नई दिल्ली, 3 अगस्त (वि.प्र./वार्ता)
केंद्र सरकार ने सुप्रीम काेर्ट काे बताया है कि नीट पेपर लीक काे लेकर विराेध करने वाले छात्राें पर केस नहीं दर्ज करेगी, लेकिन 2700 अपराधियाें पर एफआईआर कायम रहेगी. जंतर- मंतर पर प्रदर्शन-लाठीचार्ज पर सुनवाई के दाैरान केंद्र ने सुप्रीम काेर्ट काे दिया आश्वासन.
सुनवाई के दाैरान साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा-सरकार अपने वादे पर कायम है. बेंच ने कहा-जिन पुलिस वालाें ने सख्ती की है उनके खिलाफ ए्नशन जरूरी है. उन्हें बचाने का प्रयास ठीक नहीं है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम काेर्ट काे बताया है कि नीट पेपर लीक काे लेकर विराेध करने वाले छात्राें के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी. साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने साेमवार काे कहा, प्रदर्शनकारियाें के खिलाफ एफआईआर के साथ क्या किया जाए, इस पर कुछ गलतफहमी थी. लेकिन मैं कह सकता हूं कि सरकार छात्राें से किए अपने वादे काे लेकर गंभीर है. काॅकराेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने इस मसले पर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विराेध प्रदर्शन किया था. उनकी 3 मांगें थी, जाे सरकार ने मान ली थीं. इनमें एक मांग यह भी थी कि सरकार विराेध प्रदर्शन करने वालाें के खिलाफ काेई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी. सुप्रीम काेर्ट ने साेमवार काे उन याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें 20 जुलाई के संसद मार्च के दाैरान पुलिस पर बर्बरता का आराेप लगाया गया ह
वकील वृंदा ग्राेवर ने पूछा कि क्या प्रदर्शनकारियाें के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस ली जाएंगी या रद्द की जाएंगी. इस पर मेहता ने कहा कि कानूनी ताैर पर जाे भी तरीका सही हाे, सरकार अपने वादे पर कायम है. सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अगर काेई पुलिस अधिकारी जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल करता है, ताे उसे बेवजह बचाया नहीं जाना चाहिए. और ऐसा भी नहीं हाेना चाहिए कि छात्र प्रदर्शन की आड़ में किसी कुख्यात अपराधी काे बचाया जाए. गाैरतलब है कि परीक्षाओं में गड़बड़ी और नीट पेपर लीक के खिलाफ काॅकराेच जनता पार्टी का विराेध प्रदर्शन 36 दिन तक चला था. 25 जुलाई काे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद यह प्रदर्शन खत्म कर दिया गया था. बेंच प्रदर्शनकारियाें और पैलेट गन से घायलाें के आराेपाें की जांच के लिए सुप्रीम काेर्ट के पूर्व जज की अध्यक्षता में एक एसआईटी बना सकती है.