पुणे, 4 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
राजस्थान में कोई भी बच्चा आर्थिक, सामाजिक या अन्य कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं. महाराष्ट्र में बसे प्रवासी राजस्थानियों को राजस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने में सक्रिय योगदान देना चाहिए, यह आह्वान राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने किया. वे राजस्थान फाउंडेशन, पुणे चैप्टर के नए कार्यालय के उद्घाटन के अवसर पर आयोजित शैक्षणिक संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे. इससे पहले दिलावर ने मार्केटयार्ड स्थित राजस्थान फाउंडेशन के कार्यालय का उद्धाटन किया. दि पूना मर्चेंट्स चेंबर में आयोजित कार्यक्रम में राजस्थान फाउंडेशन पुणे चैप्टर के अध्यक्ष मंगलचंद चौधरी, उपाध्यक्ष राजेंद्र बाठिया, मुंबई चैप्टर अध्यक्ष गणपत कोठारी, एड .एस. के. जैन, गोसेवा आयोग अध्यक्ष शेखर मुंदड़ा, इंद्रा डूडी, साईराम डूडी, राजस्थान फाउंडेशन आयुक्त डॉ. मनीषा अरोड़ा और समग्र शिक्षा राजस्थान की आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा सहित शिक्षाविद, उद्यमी और सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित रहे. दिलावर ने कहा कि प्रवासी राजस्थानी अपने अनुभव, ज्ञान और संसाधनों का उपयोग शिक्षा, कौशल विकास और तकनीक आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने में करें. राजस्थान में शिक्षा क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों को सरकार हरसंभव सहयोग देगी. उन्होंने महाराष्ट्र में कारोबार करने वाले राजस्थानियों से राजस्थान में भी उद्योग की शाखा शुरू करने का आग्रह किया. कार्यक्रम में पुणे में राजस्थान भवन बनाने की घोषणा का करतल ध्वनि से स्वागत किया गया. यह भवन संस्कृति, भाषा, साहित्य, सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा. मंगलचंद चौधरी ने पुणे चैप्टर की भावी योजनाओं की जानकारी दी. राजेंद्र बाठिया ने प्रस्तावना, ओमप्रकाश चौधरी ने संचालन और महेंद्र व्यास ने आभार व्यक्त किया. कार्यकारिणी में कोषाध्यक्ष इन्द्र कुमार छाजेड़, सह कोषाध्यक्ष शिवजी राम चौधरी, सह सचिव रमेश चौधरी, राजेंद्र गिल, संपर्क मंत्री ओमप्रकाश चौधरी, संगठन मंत्री महेंद्र व्यास, सांस्कृतिक मंत्री सुभाष अग्रवाल, निवेश मंत्री रविंद्र मनियार, सुनील गहलोत, राजेंद्र सिंह चौधरी, सुनील खंडेलवाल, रामलाल काग, सुखदेव सिंह चारण, धनसिंह कस्वा, विजयकांत कोठारी, चंदाराम भायल, महावीर कटारिया, पुष्पा कटारिया, वोराराम चौधरी, हीरालाल फगेडिया, सोहन झुर्रिया, जयप्रकाश पुरोहित, उगमसिंह उदावत, जोराराम देवासी, बंशीलाल प्रजापति, मनोज चौधरी, सुखराम चोयल, फूसाराम ठोलिया, घनश्याम लाहोटी, राजीव कुमार प्रजापति, विशाल सैनी, प्रकाश भाटी, धनराज भाटी, गणपत लोहार, गोपाल परमार, हनुमान कड़वा, प्रेमाराम गुरुआ और मोहनलाल सुथार सहित 36 समाजबंधु उपस्थित थे.